समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खां 23 महीने बाद जेल से बाहर आ गए हैं। उनकी रिहाई के साथ ही उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर गरमाहट आ गई है। इस Azam Khan release ने सपा और भाजपा के बीच जुबानी जंग तेज कर दी है, जिससे सूबे का राजनीतिक पारा चढ़ गया है।
समाजवादी पार्टी का आरोप: भाजपा पर साधा निशाना
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आजम खां पर लगातार मुकदमे दर्ज होने और जेल में डाले जाने को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार पुलिस का राजनीतिक इस्तेमाल कर रही है और सत्ता का दुरुपयोग कर विपक्षी दलों के नेताओं पर झूठे मुकदमे थोप रही है। अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि जब सरकार पुलिस से पॉलिटिकल पोलिंग कराएगी और उसे चुनावी गोरखधंधे का हिस्सा बनाएगी, तो अवैध कार्यों, भ्रष्टाचार और वसूली में पुलिस की मिलीभगत को अनदेखा करने पर मजबूर होगी। यह Akhilesh Yadav statement भाजपा की नीतियों पर सवाल खड़ा करता है।
भाजपा का पलटवार: अनिल राजभर ने दिया जवाब
योगी सरकार के मंत्री अनिल राजभर ने अखिलेश यादव के आरोपों पर तुरंत पलटवार किया है। अनिल राजभर ने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर सरकार ने आजम खां को झूठे मुकदमों में फंसाया था, तो Samajwadi Party इतने समय तक क्या कर रही थी? उन्होंने अब तक आजम खां को क्यों नहीं छुड़ाया? अनिल राजभर का यह पलटवार सपा की रणनीति पर सवाल उठाता है।
तथ्य और न्यायालय: भाजपा का पक्ष
अनिल राजभर ने आगे कहा कि Samajwadi Party केवल वोट बैंक की राजनीति के लिए इस तरह की बयानबाजी कर रही है, जो बिल्कुल अनुचित है। उन्होंने दावा किया कि यह एक लंबी कानूनी प्रक्रिया थी जिसमें तथ्य और प्रमाण के आधार पर प्रदेश सरकार और पुलिस ने कार्रवाई की है। हमारे तथ्यों और सबूतों को न्यायालय ने भी स्वीकार किया है। अनिल राजभर ने यह भी विश्वास व्यक्त किया कि भविष्य में आजम खां पर लगे सभी आरोप सिद्ध होंगे।
राजभर ने यह भी स्पष्ट किया कि न्यायालय के दरवाजे सभी के लिए हमेशा खुले रहते हैं। उन्होंने पूछा कि अगर पुलिस ने बिना किसी आधार के कार्रवाई की होती, तो एक प्रमुख समाजवादी पार्टी नेता को इतने लंबे समय तक जेल में क्यों रहना पड़ता? न्यायालय भी निश्चित रूप से सरकार को कटघरे में खड़ा करने का प्रयास करता। यह वर्तमान UP politics में न्यायपालिका की भूमिका पर भी प्रकाश डालता है।
आगामी राजनीति पर असर
आजम खां की रिहाई के बाद से BJP और समाजवादी पार्टी के बीच बयानबाजी और तेज हो गई है। यह राजनीतिक घमासान आगामी चुनावों और प्रदेश की राजनीतिक दिशा को प्रभावित कर सकता है, ऐसे में देखना होगा कि यह राजनीतिक गरमाहट कब तक जारी रहती है और इसका क्या परिणाम सामने आता है।
