हाल ही में Samajwadi Party के अध्यक्ष Akhilesh Yadav की रामपुर यात्रा ने एक बार फिर पार्टी के भीतर चल रही सियासी खींचतान को उजागर कर दिया है। इस यात्रा के दौरान, आजम खान का दबाव इतना स्पष्ट था कि सांसद Mohibullah Nadvi को अखिलेश यादव लखनऊ से बरेली तक तो साथ लाए, लेकिन उनके संसदीय क्षेत्र रामपुर में नहीं ले गए। सवाल यह उठता है कि आखिर आजम खान अपनी ही पार्टी और अपने ही गृह जिले के सांसद से इतने खफा क्यों हैं?
आजम-नदवी अदावत: क्यों है यह सियासी दरार?
दरअसल, आजम खान और Mohibullah Nadvi के बीच की सियासी अदावत पुरानी है। इस अदावत की जड़ें तब और गहरी हो गईं जब Akhilesh Yadav ने आजम की मर्जी के खिलाफ मोहिबुल्लाह नदवी को लोकसभा चुनाव में टिकट दिया। इतना ही नहीं, आजम के समर्थकों के भारी विरोध के बावजूद नदवी चुनाव जीत गए। इस जीत को आजम खान पचा नहीं पा रहे हैं। कुछ समय पहले एक निजी चैनल पर दिए इंटरव्यू में आजम खान ने इस जीत को लेकर कहा था, “उस जीत को जीत न समझा जाए, वर्ना बात खराब हो जाएगी, मैं आज भी वही हूं जो पहले था।”
मामले में तब और तल्खी आई जब सांसद बनने के बाद Mohibullah Nadvi ने आजम खान के जेल में होने पर कहा था कि वह सुधारगृह में हैं और अल्लाह से दुआ है कि वह सुधरकर आएंगे। इस बयान पर आजम खान ने तीन दिन पहले पलटवार करते हुए कहा था, “सुधारगृह से जरूर लौटा हूं, लेकिन सुधरा नहीं हूं।”
अखिलेश की यात्रा और आजम का ‘स्पष्ट संदेश’
यही वजह रही कि बुधवार को जब Akhilesh Yadav आजम खान से मिलने रामपुर आए, तो उससे पहले उन्होंने अपने चहेते सांसद मोहिबुल्लाह नदवी से मुलाकात की। नदवी को लखनऊ से बरेली तक विमान में अपने साथ लाए, लेकिन रामपुर नहीं। सांसद के पीआरओ महबूब अली पाशा ने बताया कि सांसद मोहिबुल्लाह नदवी लखनऊ से राष्ट्रीय अध्यक्ष जी के साथ बरेली तक आए और वापसी में फिर बरेली से विमान से उनके साथ ही लखनऊ चले गए।
आजम खान और Mohibullah Nadvi के बीच की तल्खी जग जाहिर है। मंगलवार को आजम खान ने मीडिया में सांसद पर तंज कसते हुए कहा था, “मेरी बड़ी बदनसीबी है कि इतने बड़े आलिम, फाजिल मुसलमानों के कायद और इस शहर के कायद मुल्क के रहनुमा उन्हें मैं जानता नहीं हूं।” आजम खान ने Akhilesh Yadav के आगमन को लेकर यह भी कहा था कि “सुना है, मुझसे मिलने आ रहे हैं, मतलब मुझसे ही मिलेंगे, सिर्फ मुझसे…” यह संदेश साफ था कि सांसद मोहिबुल्लाह साथ न आएं। आजम की तल्खी को भांपकर अखिलेश यादव भी मोहिबुल्लाह नदवी को साथ लेकर आजम के घर नहीं गए।
मीडिया के सवालों से बचते अखिलेश, कायम रही तल्खी
जब मीडिया ने अखिलेश यादव से सांसद Mohibullah Nadvi की अनुपस्थिति पर सवाल किया, तो वे इसे टाल गए। ज्यादा पूछे जाने पर Akhilesh Yadav ने कहा कि सब कुछ आप मीडिया वाले फिक्स मत किया करो। दूसरी ओर, आजम खान ने कहा कि उनके पास कार्यक्रम सिर्फ अखिलेश यादव के आने का आया था, उनके साथ कोई आता तो वह भी सिर आंखों पर। यह सब दर्शाता है कि Rampur Politics में अभी भी आजम खान का दबदबा कायम है और Samajwadi Party के भीतर के ये आंतरिक मतभेद आने वाले समय में पार्टी के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर सकते हैं।
