मध्य प्रदेश समेत देश के कुछ राज्यों से बच्चों की Child Deaths की दुखद ख़बरों के बाद, उत्तर प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग अब पूरी तरह सतर्क हो गया है। बच्चों को दी जाने वाली कफ सिरप (Cough Syrup) को लेकर पैदा हुई गंभीर चिंताओं के बीच, सहायक आयुक्त औषधि दिनेश कुमार तिवारी ने मामले को सर्वोच्च गंभीरता से लिया है। राज्यभर के सभी जिलों को चेतावनी जारी कर दी गई है और तत्काल प्रभाव से कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
ज़हरीले कफ सिरप पर तत्काल प्रतिबंध
इस बड़े एक्शन के तहत, ‘कोल्डरिफ’ (Colderif) नामक कफ सिरप बनाने वाली कंपनी के सभी कफ सिरप की बिक्री पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह फैसला संभावित रूप से जानलेवा साबित हो रहे उत्पादों को रोकने के लिए लिया गया है। UP Health Department ने हर जिले में औषधि निरीक्षकों को सख्त आदेश दिए हैं कि वे सभी सरकारी और गैर-सरकारी अस्पतालों, साथ ही मेडिकल स्टोर पर इस कंपनी द्वारा बनाए गए किसी भी कफ सिरप की उपलब्धता की गहन जांच करें। यदि ऐसे कोई भी उत्पाद पाए जाते हैं, तो उन्हें तुरंत जब्त कर लिया जाए और उनकी बिक्री रोकने की कार्रवाई अविलंब शुरू की जाए।
जानलेवा रसायन और जांच प्रक्रिया
मामले की गंभीरता तब और बढ़ जाती है जब सहायक औषधि आयुक्त के आदेश में मेसर्स स्रेशन फार्मक्यूटिकल द्वारा निर्मित कोल्ड आरआईएफ़ सिरप के एक खास बैच में Toxic Chemicals जैसे डाईएथिलीन ग्लाइकाल (Diethylene Glycol) और एथेलिन ग्लाइकाल (Ethylene Glycol) की मौजूदगी की आशंका जताई गई है। ये दोनों रसायन शरीर के लिए बेहद खतरनाक हैं और इनका सेवन जानलेवा साबित हो सकता है। आदेश के तहत, इन सभी संदिग्ध कफ सिरप के नमूने तत्काल संकलित कर जांच के लिए लखनऊ स्थित राज्य औषधि प्रयोगशाला में भेजे जा रहे हैं।
सरकार का सख्त रुख और लापरवाही पर चेतावनी
दूसरी तरफ, राज्य सरकार ने भी इस मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरतने के कड़े निर्देश दिए हैं। सभी संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट कहा गया है कि जब तक प्रयोगशाला से जांच रिपोर्ट प्राप्त नहीं हो जाती, तब तक उक्त कफ सिरप का प्रयोग पूर्णतः बंद रखा जाए। सहायक औषधि आयुक्त तिवारी ने अपने आदेश में सभी औषधि विक्रेताओं, सरकारी और गैर-सरकारी अस्पतालों को निर्देशित किया है कि उक्त बैच के कफ सिरप की बिक्री, वितरण और उपयोग तत्काल प्रभाव से रोका जाए। साथ ही, दुकानों व अस्पतालों में उपलब्ध स्टॉक का नमूना जांच हेतु तुरंत लखनऊ स्थित राज्य औषधि प्रयोगशाला में भेजा जाए।
दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई
औषधि निरीक्षकों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि वे सभी स्थानों पर औषधि की उपलब्धता की जांच करें और एकत्र किए गए नमूनों की ऑनलाइन रिपोर्ट दर्ज करें। इतना ही नहीं, निर्माण प्रयोगशालाओं को भी कफ सिरप में प्रयुक्त प्रोपलीन ग्लाइकाल के नमूनों की जांच करने को कहा गया है। सहायक आयुक्त ने साफ तौर पर कहा है कि लखनऊ प्रयोगशाला से जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद, जो भी उत्पादक या वितरक दोषी पाए जाएंगे, उन पर आवश्यक दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि भविष्य में ऐसी किसी भी लापरवाही से बच्चों के जीवन के साथ खिलवाड़ न हो।
