खरसिया के दर्रामुड़ा स्थित सारडा एनर्जी एंड मिनरल्स में हाल ही में कर्मचारियों के वेतन वृद्धि (employee increment) को लेकर एक बड़ा हंगामा देखने को मिला। लेकिन यह विवाद केवल वेतन तक सीमित नहीं रहा; स्थानीय नेताओं की एंट्री ने इसे राजनीति और दबंगई का रंग दे दिया। सूत्रों की मानें तो इस पूरे मामले में बैकऐंड में लाखों टन फ्लाई ऐश (fly ash) के ट्रांसपोर्ट का करोड़ों का खेल छुपा है। यह घटना Raigarh जिले में स्थानीय political interference का एक जीता-जागता उदाहरण बन गई है।
दबंगई का ‘फिल्मी’ अंदाज़: भाजपा नेता ने अड़ाई कार
भाजपा नेता और जिला पंचायत सदस्य श्रीमती सतबाई पटेल के पति छोटेलाल पटेल ने सत्ता के नशे में चूर होकर सारी हदें पार कर दीं। फिल्मी अंदाज़ में उन्होंने अपनी कार (CG-13 AV-9817) सीधे प्लांट गेट पर अड़ा दी, जिससे न प्लांट के अंदर कोई वाहन जा सका और न बाहर निकल पाया। इसका नतीजा यह हुआ कि कई किलोमीटर तक भारी वाहनों की कतार लग गई, और आम जनता व ट्रांसपोर्टर घंटों तक परेशान रहे। यह एक स्पष्ट corporate dispute में बाहरी हस्तक्षेप था, जिसने आम लोगों की परेशानी बढ़ा दी।
इंक्रीमेंट विवाद या नेताओं का खेल?
कर्मचारियों के दो गुट भेदभाव का आरोप लगाकर प्रबंधन पर अन्याय का आरोप जड़ रहे थे। लेकिन हकीकत यह है कि वेतन वृद्धि (employee increment) के इस मुद्दे में भी स्थानीय नेताओं ने अपनी राजनीति घुसेड़ दी। भाजपा और कांग्रेस दोनों के लोग मौके पर पहुंचे और कर्मचारियों की आड़ में अपने-अपने लोगों के हितों की लड़ाई लड़ने लगे। भाजपा नेता और जिला पंचायत अध्यक्ष पति रविंद्र गवेल भी प्लांट पहुंचे और अपने लोगों के पक्ष में प्रबंधन पर दबाव डालते नजर आए। यह स्थिति दिखाती है कि कैसे एक सामान्य corporate dispute को राजनीतिक रंग दिया जा सकता है, जिससे समस्या और भी जटिल हो जाती है।
प्रशासन भी बेबस: एसडीएम की गाड़ी भी फंसी जाम में
हालात इतने बिगड़ गए कि मौके पर पहुंचे एसडीएम प्रवीण तिवारी की सरकारी गाड़ी भी जाम में घंटों फंसी रही। बड़ी मशक्कत के बाद ही वे प्लांट परिसर तक पहुंच पाए। यह नजारा बताने के लिए काफी था कि सत्ता के नशे में चूर एक नेता की दबंगई ने प्रशासन तक को बेबस कर दिया। एसडीएम प्रवीण तिवारी ने समझाइश देकर मामला शांत कराया और प्रबंधन को परफॉरमेंस के आधार पर वेतन वृद्धि करने की सलाह दी। उन्होंने बताया, "सारडा एनर्जी में विवाद की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचा। गेट पर एक गाड़ी खड़ी होने से भारी जाम लग गया था। स्थिति को नियंत्रण में लेने के लिए बैठक कर कर्मचारियों और प्रबंधन के बीच विवाद का समाधान कराया गया।"
करोड़ों का फ्लाई ऐश धंधा: क्या है असली वजह?
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरे विवाद की असली वजह कर्मचारियों का वेतन नहीं, बल्कि करोड़ों का फ्लाई ऐश (fly ash) ठेका है। Raigarh और खरसिया के प्लांटों से रोजाना हजारों टन फ्लाई ऐश सक्ती और आसपास डंप किया जाता है। इस काम में राजनीति का सीधा दखल है। नेताओं के करीबी ठेकेदार इस धंधे से मोटा मुनाफा कमा रहे हैं और ठेका हथियाने की खींचतान हमेशा बनी रहती है। यही वजह है कि वेतन वृद्धि (employee increment) जैसे मुद्दे पर भी स्थानीय नेता कूद पड़े और कर्मचारियों की नाराजगी को अपने फायदे का हथियार बना लिया। यह स्पष्ट रूप से एक बड़ा corporate dispute था, जिसके तार गहरे थे और स्थानीय political interference ने इसे और हवा दी।
