अमेरिका द्वारा H-1B वीजा पर हर साल एक लाख डॉलर (लगभग 88 लाख रुपये) का भारी-भरकम शुल्क लगाए जाने के फैसले ने भारतीय राजनीति में हलचल मचा दी है। इस फैसले के बाद, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है और उन्हें ‘कमजोर प्रधानमंत्री’ करार दिया है। विपक्षी दलों का कहना है कि इस कदम से सबसे ज्यादा असर भारतीय लोगों पर पड़ेगा, खासकर भारतीय तकनीकी कर्मचारियों (Indian IT Workers) पर।
राहुल गांधी ने PM मोदी पर बोला जोरदार हमला
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस फैसले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाना बनाया। उन्होंने अपने पुराने X (पहले ट्विटर) पोस्ट को साझा करते हुए कहा, ‘मैं फिर कहता हूं, भारत के पास एक कमजोर प्रधानमंत्री हैं।’ राहुल गांधी ने जुलाई 2017 की अपनी एक पोस्ट को भी इसमें शामिल किया, जिसमें उन्होंने पीएम मोदी पर ‘कमजोर प्रधानमंत्री’ होने का आरोप लगाया था। यह आरोप तब लगाया गया है जब अमेरिका ने H-1B Visa से जुड़े एक अहम फैसले पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत अब हर साल एक लाख डॉलर (लगभग 88 लाख रुपए) फीस ली जाएगी। यह निर्णय सीधे तौर पर भारत से जुड़े US Visa Policy को प्रभावित करता है।
‘मोदी-मोदी के नारे लगवाना विदेश नीति नहीं’ – खड़गे
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति पर कटाक्ष करते हुए कहा कि ‘गले लगना और मोदी-मोदी के नारे लगवाना’ विदेश नीति नहीं है। उन्होंने X पर एक पोस्ट में कहा कि विदेश नीति में राष्ट्रीय हितों को सर्वोच्च रखना चाहिए और किसी से भी मित्रता को विवेक और संतुलन के साथ आगे बढ़ाना चाहिए। खड़गे ने प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन का जिक्र करते हुए लिखा कि ‘नरेंद्र मोदी जी, आपके जन्मदिन पर फोन कॉल के बाद आपको जो जवाबी तोहफा मिला है, उससे भारतीय नागरिकों को दुख हुआ है। यह आपकी ‘अबकी बार, ट्रंप सरकार’ की ओर से जन्मदिन का जवाबी तोहफा है।’ यह बयान Donald Trump के फैसले के बाद आया है।
भारतीय तकनीकी कर्मचारी होंगे सबसे ज्यादा प्रभावित
खड़गे ने इस बात पर जोर दिया कि H-1B वीजा पर एक लाख डॉलर का वार्षिक शुल्क भारतीय तकनीकी कर्मचारियों को सबसे अधिक प्रभावित करेगा। उन्होंने बताया कि कुल H-1B वीजा धारकों में से 70 प्रतिशत भारतीय हैं। खड़गे ने यह भी दावा किया कि पहले ही 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया जा चुका है, जिससे अकेले 10 क्षेत्रों में भारत को 2.17 लाख करोड़ रुपये का नुकसान अनुमानित है। उन्होंने ‘हायर अमेरिकन’ अधिनियम का हवाला देते हुए कहा कि यह भारतीय आउटसोर्सिंग को लक्षित करता है। खड़गे ने कहा, ‘यहां तक कि यूरोपीय संघ से भारतीय वस्तुओं पर 100 प्रतिशत शुल्क लगाने का आह्वान भी किया गया।’
अन्य विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रिया
कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई ने कहा कि H-1B वीजा पर इस हालिया फैसले से अमेरिकी सरकार ने भारत के सर्वश्रेष्ठ और प्रतिभाशाली दिमागों के भविष्य पर हमला किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अब प्रधानमंत्री मोदी की रणनीतिक-चुप्पी और सिर्फ दिखावे की तरकीब अपनाना भारत और उसके नागरिकों के राष्ट्रीय हित के लिए बोझ बन गया है। समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी भारत की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। यह स्पष्ट है कि H-1B Visa के इस नए नियम से देश में राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
