कानपुर में एक बड़ी और ऐतिहासिक कार्रवाई को अंजाम देते हुए, कानपुर विकास प्राधिकरण (KDA) ने मंगलवार को करीब 500 करोड़ रुपये की एक बेशकीमती जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराया। यह जमीन कुख्यात Akhilesh Dubey के कब्जे में थी, जिस पर लंबे समय से विवाद चल रहा था। इस अभियान के तहत साकेत नगर में बुलडोजरों के साथ भारी पुलिस बल तैनात किया गया, जिसने अवैध रूप से बने ढांचों को ध्वस्त कर दिया।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, यह Saket Nagar Property भूखंड संख्या- 70 में स्कूल बनाने के लिए KDA ने जवाहर विद्या समिति को आवंटित की थी। आरोप है कि बाद में अखिलेश दुबे ने अन्य लोगों के साथ मिलकर इस जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया और इसे एक पार्क का रूप दे दिया। इसके बाद से जवाहर विद्या समिति अपनी जमीन वापस पाने के लिए लगातार कानूनी लड़ाई लड़ रही थी। यह मामला किदवई नगर थाना क्षेत्र का है, और इस पर कई सालों से न्यायालयों में सुनवाई चल रही थी।
सुप्रीम कोर्ट का निर्देश और KDA की कार्रवाई
इस मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब साल 2024 में Supreme Court Order ने KDA को निर्देश दिया कि वह जमीन को कब्जामुक्त कराकर उसके मूल आवंटी को सौंपे। सुप्रीम कोर्ट के इस निर्देश के बाद KDA ने पहले भी एक बार कार्रवाई का प्रयास किया था, लेकिन तब उन्हें भारी विरोध का सामना करना पड़ा था, जिसके चलते टीम को वापस लौटना पड़ा था।
हालांकि, अखिलेश दुबे के जेल जाने के बाद अधिकारी एक बार फिर हरकत में आए और इस बार पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरे। मंगलवार को KDA के अधिकारी, किदवई नगर सहित 6 थानों की फोर्स, 2 प्लाटून पीएसी और 5 बुलडोजरों के साथ कब्जा ध्वस्त करने पहुंचे। किदवई नगर थाना प्रभारी धर्मेंद्र कुमार राम ने बताया कि KDA की मांग पर पर्याप्त फोर्स उपलब्ध कराई गई थी और Kanpur Land Encroachment अब समाप्त हो गया है।
विरोध के बावजूद सफल रहा अभियान
मंगलवार दोपहर 2 बजे KDA की टीम साकेत नगर पहुंची। पार्क के चारों छोर से 5 बुलडोजर बाउंड्री तोड़कर अंदर घुसे। करीब एक घंटे तक चले अभियान में बुलडोजरों ने सभी अवैध कब्जों और निर्माण को ध्वस्त कर दिया। इस दौरान पुलिस-पीएसी फोर्स मौजूद रहा। पूरी कार्रवाई करीब 1 घंटे तक चली। हालांकि, कुछ महिलाओं ने इस KDA Action का विरोध करने की कोशिश की, लेकिन महिला पुलिसकर्मियों ने उन्हें समझा-बुझाकर शांत करा दिया। इस तरह, लंबे समय से चला आ रहा यह विवाद आखिरकार अपने अंजाम तक पहुंचा और 500 करोड़ की यह जमीन न्याय के बाद अपने वास्तविक हकदार को वापस मिलने का रास्ता साफ हुआ।
