आजादी के बाद पहली बार बिहार की राजधानी पटना एक ऐतिहासिक राजनीतिक घटना का गवाह बन रही है। यहां कांग्रेस की राष्ट्रीय कार्यसमिति (CWC) की विस्तारित बैठक आयोजित की जा रही है, जो पार्टी के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण दिशा तय कर सकती है। इस बैठक में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष Mallikarjun Kharge सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता हिस्सा ले रहे हैं।
ऐतिहासिक क्षण का गवाह बन रहा पटना
लगभग 85 साल बाद पटना में हो रही कांग्रेस की यह विशाल बैठक अपने आप में एक मील का पत्थर है। आजादी के बाद यह पहला अवसर है जब बिहार की धरती पर इस स्तर की Congress CWC Meeting बुलाई गई है। इस एक दिवसीय आयोजन में देश भर से 225 से अधिक बड़े नेता शामिल हो रहे हैं, जो पार्टी की मौजूदा रणनीति और आगामी चुनौतियों पर गहन विचार-विमर्श करेंगे। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब Indian National Congress देश की राजनीतिक दिशा में अपनी भूमिका को पुनः मजबूत करने का प्रयास कर रही है।
शीर्ष नेताओं का जमावड़ा और गांधी परिवार की बिहार में दस्तक
बैठक के लिए नेताओं का पटना पहुंचना शुरू हो गया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष Mallikarjun Kharge पहले ही पटना पहुंच चुके हैं। इनके अलावा, पार्टी के वरिष्ठ नेता के.सी. वेणुगोपाल, जयराम रमेश, भूपेश बघेल, रणदीप सुरजेवाला, सुप्रिया श्रीनेत, अजय माकन, कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार सहित कई राज्यों के बड़े नेता उपस्थित हैं। इस बैठक का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि पार्टी की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा एक साथ पटना पहुंच रही हैं। यह पहला अवसर है जब गांधी परिवार के तीनों सदस्य एक साथ बिहार की राजनीतिक जमीन पर कदम रख रहे हैं, जो Gandhi Family Bihar कनेक्शन के महत्व को दर्शाता है।
तैयारियां जोरों पर, शहर में उत्साह का माहौल
बारिश के बावजूद प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व ने बैठक की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। पटना की सड़कें कांग्रेस के झंडों और नेताओं के स्वागत-सूत्रों से सजी हुई हैं, जो शहर में एक उत्सवपूर्ण माहौल पैदा कर रही हैं। सदाकत आश्रम, जहां यह बैठक हो रही है, एक बार फिर से राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है। इन तैयारियों से साफ है कि कांग्रेस इस आयोजन को ऐतिहासिक बनाना चाहती है और Patna Politics के संदर्भ में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराना चाहती है।
कांग्रेस की बिहार में खोई जमीन तलाशने की कवायद
यह बैठक केवल एक संगठनात्मक कवायद नहीं, बल्कि बिहार में कांग्रेस की राजनीतिक वापसी का एक बड़ा प्रयास भी है। लंबे अरसे बाद कांग्रेस ने बिहार को अपनी राजनीति के केंद्र में रखा है। पार्टी इस आयोजन के माध्यम से अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने और कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने की उम्मीद कर रही है। आगामी चुनावों के मद्देनजर, इस बैठक में होने वाले निर्णय और चर्चाएं बिहार सहित देश की राजनीति पर दूरगामी प्रभाव डाल सकती हैं।
