दिल्ली के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में शुरू हुए 11 निर्माणाधीन अस्पतालों का भविष्य अब नई सरकार के हाथों में है। ये अस्पताल, जिनमें चार सामान्य और सात विशेषीकृत ICU Beds अस्पताल शामिल हैं, वर्षों से Funding Crisis और प्रशासनिक अड़चनों के कारण अधर में लटके हुए थे। अब भाजपा सरकार ने इन परियोजनाओं को फिर से शुरू करने की घोषणा की है, जिससे दिल्लीवासियों में उम्मीद की नई किरण जगी है।
फंडिंग का इंतजार और परियोजना का अधर में लटकना
राजधानी दिल्ली में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए शुरू किए गए ये 11 अस्पताल लंबे समय से फंड का इंतजार कर रहे हैं। इनमें शालीमार बाग, सुल्तानपुरी, ज़ीटीबी अस्पताल, गीता कॉलोनी, रघुबीर नगर और सरिता विहार जैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर बन रहे अस्पताल शामिल हैं। हैरानी की बात यह है कि किराड़ी अस्पताल का काम तो अभी तक शुरू भी नहीं हो सका है। PWD Delhi विभाग इन परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक धन की प्रतीक्षा कर रहा है। पिछली सरकार के कार्यकाल में इनका काम थम गया था, लेकिन अब सत्ता में आई भाजपा सरकार ने इन्हें फिर से चालू करने का संकल्प लिया है। इस Construction Delay ने न केवल लागत बढ़ाई है, बल्कि नागरिकों को मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं पर भी नकारात्मक प्रभाव डाला है।
आईसीयू अस्पतालों पर विवाद और देरी की कहानी
इन 11 Delhi Hospitals में से सात विशेष रूप से ICU Beds वाले अस्पताल हैं, और इनकी कहानी विवादों से घिरी रही है। कोरोना महामारी के चरम (2021) के दौरान दिल्ली में ICU Beds की भारी कमी महसूस की गई थी। उस समय इन सात स्थानों पर छह महीने के भीतर ICU Beds तैयार करने की योजना बनाई गई थी। इन इमारतों के निर्माण में बड़े स्तर पर लोहे का काम हुआ, यह उम्मीद थी कि इनसे दिल्ली में आईसीयू बेड की उपलब्धता में क्रांतिकारी सुधार आएगा।
हालांकि, यह परियोजना लगातार देरी का शिकार हुई। 2023 में इसका काम पूरी तरह से रुक गया क्योंकि तत्कालीन दिल्ली की आप सरकार ने इनके लिए फंड जारी नहीं किया। जब इनकी इमारतें आंशिक रूप से तैयार हो रही थीं, तब तक कोरोना महामारी का प्रकोप कम हो चुका था और सरकार की प्राथमिकताएं बदल चुकी थीं।
विवाद केवल फंडिंग तक सीमित नहीं रहा। ICU Beds के टेंडर को लेकर भी सवाल उठे। दरअसल, लोक निर्माण विभाग के एक अधिकारी ने अपनी सेवानिवृत्ति वाले दिन ही इन सात टेंडरों को मंजूरी दे दी थी, जिसने कई भौहें चढ़ा दी थीं।
नई सरकार की पहल और भविष्य की राह
दिल्ली की सत्ता में भाजपा के आने के बाद, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इन लंबित परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित किया है। उन्होंने साफ किया है कि जनता के पैसे को बर्बाद नहीं होने दिया जाएगा और इन ICU Beds वाली इमारतों को पूर्ण आईसीयू अस्पतालों के रूप में स्थापित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने इन अस्पतालों का काम फिर से शुरू करने की घोषणा की है, जिससे दिल्ली के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
यह पहल न केवल लटकी हुई परियोजनाओं को गति देगी, बल्कि दिल्ली के नागरिकों को बेहतर और अधिक सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रदान करेगी। इन Delhi Hospitals के पूरा होने से राजधानी में ICU Beds की संख्या में वृद्धि होगी, जो भविष्य की किसी भी स्वास्थ्य आपात स्थिति से निपटने में सहायक सिद्ध होगा। अब देखना यह है कि PWD Delhi और नई सरकार मिलकर कितनी तेजी से इन परियोजनाओं को साकार कर पाते हैं।
