भारतीय शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की चाल पर हमेशा निवेशकों की नज़र रहती है। सितंबर महीने के शुरुआती 15 दिनों के FII Buying Data ने कुछ मिली-जुली तस्वीर पेश की है, जो अगस्त की तुलना में एक अलग रणनीति को दर्शाती है। जहां कुछ सेक्टर्स में खरीदारी का रुझान बढ़ा है, वहीं कुछ सेक्टर्स से निवेशकों ने दूरी बनाई है। आइए, सितंबर की पहली छमाही में Indian Stock Market में विदेशी पूंजी के प्रवाह को विस्तार से समझते हैं।
सितंबर की शुरुआत में FIIs की बदली रणनीति
अगस्त महीने में जहां IT और फाइनेंशियल्स जैसे बड़े सेक्टरों में भारी बिकवाली देखी गई थी, वहीं सितंबर के पहले पखवाड़े में इन दोनों सेक्टर्स से आउटफ्लो (पैसे की निकासी) में उल्लेखनीय कमी आई है। यह एक संकेत है कि इन सेक्टर्स पर दबाव अब कुछ कम हो रहा है। इसके विपरीत, ऑटो, FMCG और कैपिटल गुड्स जैसे सेक्टर्स में विदेशी निवेशकों का भरोसा लगातार बना हुआ है और इनमें लगातार इनफ्लो (पैसे का प्रवाह) जारी है। हालांकि, केमिकल्स सेक्टर में खरीदारी लगभग थम सी गई है, जबकि हेल्थकेयर और कंज्यूमर सर्विसेज जैसे सेक्टरों में अगस्त की खरीदारी सितंबर में बिकवाली में बदल गई है।
IT और फाइनेंशियल्स में थमी बिकवाली
अगस्त के दूसरे पखवाड़े में IT सेक्टर से ₹4,905 करोड़ और फाइनेंशियल सर्विसेज से ₹9,817 करोड़ का बड़ा आउटफ्लो हुआ था। लेकिन September FII Data के अनुसार, सितंबर के पहले 15 दिनों में यह आंकड़ा काफी घट गया। IT से केवल ₹228 करोड़ और फाइनेंशियल्स से ₹185 करोड़ का ही आउटफ्लो हुआ। यह दर्शाता है कि इन प्रमुख सेक्टर्स में बिकवाली का दबाव काफी कम हुआ है, जिससे निवेशकों में कुछ राहत देखी जा सकती है।
ऑटो, FMCG और कैपिटल गुड्स में जारी है खरीदारी
विदेशी निवेशकों का भरोसा ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स सेक्टर पर बरकरार रहा, जिसमें सितंबर (1-15) में ₹216 करोड़ का इनफ्लो आया। FMCG सेक्टर ने भी मजबूत प्रदर्शन किया, जहां ₹185 करोड़ का इनफ्लो रहा, जो अगस्त की तुलना में अधिक है। कैपिटल गुड्स में भी ₹172 करोड़ का इनफ्लो दर्ज किया गया, जो पिछले महीने के मुकाबले बेहतर रहा। ये आंकड़े FII Investment Trends में इन सेक्टर्स के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण को उजागर करते हैं।
केमिकल्स, हेल्थकेयर और कंज्यूमर सर्विसेज में सावधानी
जो केमिकल्स सेक्टर अगस्त के दूसरे पखवाड़े में ₹1,161 करोड़ के जोरदार इनफ्लो का गवाह बना था, वहां सितंबर में केवल ₹3 करोड़ का मामूली इनफ्लो देखने को मिला। यह संकेत देता है कि इस सेक्टर में निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपना रहे हैं।
मामला हेल्थकेयर और कंज्यूमर सर्विसेज सेक्टर में पूरी तरह से पलट गया। अगस्त में हेल्थकेयर में ₹678 करोड़ का इनफ््लो था, जो सितंबर में ₹228 करोड़ के आउटफ्लो में बदल गया। इसी तरह, कंज्यूमर सर्विसेज अगस्त में ₹490 करोड़ के इनफ्लो से सितंबर में ₹368 करोड़ के आउटफ्लो पर आ गईं। यह Sectoral FII Flows में एक महत्वपूर्ण बदलाव है।
अन्य प्रमुख सेक्टर्स का विश्लेषण
- मेटल्स एंड माइनिंग: इस सेक्टर में हल्की रिकवरी दिखी है। अगस्त के ₹1,266 करोड़ आउटफ्लो की तुलना में सितंबर में सिर्फ ₹158 करोड़ आउटफ्लो रहा।
- रियल्टी: रियल्टी सेक्टर में मामूली गिरावट रही (सितंबर: ₹218 करोड़ आउटफ्लो Vs अगस्त: ₹34 करोड़ आउटफ्लो)।
- ऑयल, गैस और कंज्यूमेबल्स तथा टेलीकॉम: इन सेक्टर्स से आउटफ्लो क्रमशः ₹170 करोड़ और ₹170 करोड़ रहा।
निष्कर्ष: संतुलित रणनीति की ओर FIIs
कुल मिलाकर, सितंबर की पहली पखवाड़े में विदेशी संस्थागत निवेशकों की रणनीति काफी संतुलित रही। IT और फाइनेंशियल्स जैसे बड़े सेक्टरों में बिकवाली का दबाव कम हुआ है, जबकि ऑटो, FMCG और कैपिटल गुड्स में उनका भरोसा बरकरार है। हालांकि, हेल्थकेयर, कंज्यूमर सर्विसेज और केमिकल्स जैसे सेक्टर फिलहाल निवेशकों के रडार से कुछ बाहर होते दिख रहे हैं। निवेशकों को FII Buying Data के इन रुझानों को ध्यान में रखते हुए अपने निवेश निर्णयों पर विचार करना चाहिए।
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी सामान्य विश्लेषण पर आधारित है और निवेश की सलाह नहीं है। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से राय अवश्य लें।)
