प्रयागराज के मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज से संबद्ध एसआरएन अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह चरमरा गई हैं। जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल बुधवार को भी जारी रही, जिसके चलते हजारों मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। यह हड़ताल एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना के विरोध में हो रही है, जिसने पूरे चिकित्सा समुदाय को आक्रोशित कर दिया है।
डॉक्टर पर हमला: विरोध प्रदर्शन का मूल कारण
यह विरोध सोमवार को जूनियर रेजिडेंट डॉ. अनुराग कुमार के साथ हुई मारपीट की घटना के खिलाफ है। इस घटना ने मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के Medical College Junior Doctors की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। चिकित्सकों का आरोप है कि कार्यस्थल पर उन्हें लगातार असुरक्षा का सामना करना पड़ रहा है।
ठप पड़ी स्वास्थ्य सेवाएं: मरीजों की बढ़ी मुश्किलें
हड़ताल के कारण अस्पताल में बुधवार को न तो ओपीडी चली और न ही नए मरीज देखे गए। मरीजों की जांचें रुक गईं और पर्चे भी नहीं बने। दूर-दराज से आए लगभग 2500 मरीजों को बिना इलाज के ही वापस लौटना पड़ा, जबकि 60 से अधिक महत्वपूर्ण ऑपरेशन टल गए। गंभीर रोगियों को बेली और कॉल्विन जैसे अन्य अस्पतालों में रेफर करना पड़ा, जिससे अस्पताल में Patient Care Disruption साफ दिख रही थी। इस स्थिति ने आम जनता के लिए बड़ी परेशानी खड़ी कर दी है।
विरोध प्रदर्शन और बुलंद आवाज: ‘नो सेफ्टी, नो ड्यूटी’
बुधवार सुबह 10 बजे तक करीब 150 जूनियर डॉक्टर ट्रामा सेंटर के शेड के नीचे इकट्ठा हो गए। धरने पर बैठने के लिए उन्होंने ट्रामा सेंटर के बेड से गद्दे और चादरें ले लीं। हाथों में तख्तियां लिए डॉक्टर ‘नो सेफ्टी, नो ड्यूटी’ और ‘न्याय में देरी, अन्याय को बढ़ावा’ जैसे नारे लगा रहे थे। विरोध प्रदर्शन बढ़ता देख, ट्रामा सेंटर के गेट पर बैरिकेडिंग कर दी गई। ट्रामा सेंटर में हो रही इस Prayagraj Doctors Strike की खबर सुनकर दूसरे विभागों के भी लगभग 400 डॉक्टर विरोध प्रदर्शन में शामिल हो गए। सभी डॉक्टर आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग को लेकर बेहद आक्रोशित थे, जिसके कारण SRN Hospital Protest ने एक बड़ा रूप ले लिया।
अधिकारियों से बातचीत और आश्वासन, फिर भी जारी संघर्ष
दोपहर करीब 12 बजे, एडीएम सिटी सत्यम मिश्र, डीसीपी नगर मनीष शांडिल्य, मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. वीके पांडेय और डॉ. अमित सिंह जूनियर डॉक्टरों से बात करने पहुंचे। एडीएम सिटी ने शाम छह बजे तक आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया। इस आश्वासन के बाद दोपहर एक बजे सभी डॉक्टर धरना स्थल से चले गए।
हालांकि, अधिकारियों का आश्वासन पूरा न होने पर, शाम 6:30 बजे जूनियर डॉक्टर फिर से ट्रामा सेंटर के बाहर बैठ गए। उनका स्पष्ट कहना है कि जब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती, उनकी यह हड़ताल जारी रहेगी। यह घटना चिकित्सा कर्मियों की Doctor Safety सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल देती है और प्रशासन पर तत्काल कार्रवाई का दबाव बढ़ा रही है।
