पटना जू (Patna Zoo), जिसे आधिकारिक तौर पर संजय गांधी जैविक उद्यान (Sanjay Gandhi Biological Park) के नाम से जाना जाता है, गैंडों की संख्या के मामले में विश्व के चिड़ियाघरों में एक विशिष्ट स्थान रखता है। सैन डिएगो जू, अमेरिका के बाद यह दुनिया में गैंडों का दूसरा सबसे बड़ा घर है, जो अपने सफल Rhino conservation और Wildlife breeding प्रयासों के लिए प्रसिद्ध है। वर्तमान में, इस उद्यान में कुल 10 गैंडे निवास करते हैं, जिनमें छह नर और चार मादा शामिल हैं, जो चार विभिन्न नस्लों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
गैंडों के आगमन की कहानी: एक ऐतिहासिक शुरुआत
पटना जू में गैंडों का सफर 28 मई 1979 को शुरू हुआ, जब असम से नर गैंडा ‘कांछा’ और मादा गैंडा ‘कांछी’ का एक जोड़ा लाया गया। यह एक महत्वपूर्ण कदम था जिसने इस उद्यान में Indian Rhinoceros के संरक्षण की नींव रखी। इसके लगभग तीन वर्ष बाद, 28 मार्च 1982 को बेतिया से रेस्क्यू किया गया तीसरा नर गैंडा ‘राजू’ भी पटना जू का अभिन्न अंग बना।
सफल प्रजनन और संख्या में वृद्धि
पटना जू के उत्कृष्ट प्रबंधन, वैज्ञानिक प्रजनन कार्यक्रमों और बेहतर रख-रखाव के कारण जल्द ही गैंडों का सफल प्रजनन शुरू हो गया। नर गैंडा राजू और मादा गैंडा कांछी के मिलन से 8 जुलाई 1988 को पहली मादा गैंडा ‘हड़ताली’ का जन्म हुआ। यह पटना जू के लिए एक बड़ी उपलब्धि थी, जिसने यह दर्शाया कि यहां गैंडों के प्रजनन के लिए अनुकूल वातावरण मौजूद है। इसके बाद, राजू और कांछी के द्वारा एक और मादा गैंडा ‘रानी’ का जन्म हुआ। इन सफलताओं के साथ, 1991 तक पटना जू में गैंडों की संख्या पांच हो गई, जो Wildlife breeding के क्षेत्र में एक गौरवपूर्ण मील का पत्थर था। असम से लाए गए नर गैंडा कांछा और मादा गैंडा कांछी के मिलन से 19 दिसंबर 1993 को नर गैंडा ‘राजा’ का जन्म हुआ। वहीं, 1988 में उद्यान में जन्मी मादा गैंडा हड़ताली ने नौ वर्ष की उम्र में 1997 में एक नर गैंडा ‘बजरंगी’ को जन्म दिया, जिसने Rhino conservation के प्रयासों को और गति प्रदान की।
अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और नस्ल सुधार के प्रयास
नस्ल की गुणवत्ता को बढ़ाने और आनुवंशिक विविधता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, पटना जू ने समय-समय पर वन्यजीव अदला-बदली कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से भाग लिया। इसी क्रम में, 2005 में दिल्ली चिड़ियाघर से एक नर गैंडा ‘अयोध्या’ को लाया गया। इसके दो साल बाद, 2007 में कैलिफ़ोर्निया, यूएसए के सैन डिएगो जू से एक मादा गैंडा ‘गैरी’ और उसका शिशु गैंडा ‘लाली’ भी पटना जू पहुंचे। इन अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों ने Sanjay Gandhi Biological Park को गैंडों के लिए एक महत्वपूर्ण वैश्विक केंद्र बना दिया है और यह Indian Rhinoceros के भविष्य के लिए एक उम्मीद की किरण है।
आज, Patna Zoo न केवल एक प्रमुख पर्यटक आकर्षण है, बल्कि Rhino conservation और Wildlife breeding के क्षेत्र में एक वैश्विक नेता भी है, जो इन शानदार जीवों के अस्तित्व को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
