इंदौर के माता जीजाबाई शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय (ओल्ड जीडीसी) में उस वक्त हड़कंप मच गया जब पूरक परीक्षाओं के नतीजों में 600 से अधिक छात्राएं अनुत्तीर्ण पाई गईं। इस चौंकाने वाले परिणाम ने छात्राओं के साथ-साथ उनके अभिभावकों को भी स्तब्ध कर दिया। सोमवार को परिणाम घोषित होते ही छात्राओं का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने कॉलेज परिसर में जमकर हंगामा किया, मूल्यांकन में गड़बड़ी का आरोप लगाया।
छात्रों का आरोप: खराब मूल्यांकन और पक्षपात
बीएससी और एमएससी पाठ्यक्रम की छात्राओं ने सीधे तौर पर मूल्यांकन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन ठीक से नहीं किया गया है, जिसके कारण उन्हें कई विषयों में बेहद कम, यानी तीन से पांच अंक ही मिले हैं। छात्राओं ने आरोप लगाया कि आंतरिक मूल्यांकन (Internal assessment) में भी शिक्षकों ने पक्षपात किया है, जिससे उनके परिणाम प्रभावित हुए हैं। अपनी समस्याओं के समाधान के लिए, छात्राओं ने सबसे पहले परीक्षा नियंत्रक को लिखित शिकायत दी, और जब कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो उन्होंने प्राचार्य का घेराव कर विरोध प्रदर्शन किया। यह घटना एक बड़े student protest में बदल गई।
कॉलेज प्रबंधन का जवाब: विशेष फॉर्म और बाहरी शिक्षकों से जांच
छात्राओं के बढ़ते दबाव और हंगामे के बाद, कॉलेज प्रबंधन ने मामले की गंभीरता को समझते हुए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। कॉलेज ने एक विशेष फॉर्मेट वाला फॉर्म जारी किया है, जिसमें छात्राओं से पांच बिंदुओं पर विस्तृत जानकारी मांगी गई है। इस फॉर्म में छात्रा का नाम, पाठ्यक्रम, रोल नंबर, विषय और पूरक परीक्षा में प्राप्त अंक जैसी महत्वपूर्ण जानकारी शामिल करनी होगी। छात्राओं को यह फॉर्म बुधवार तक भरकर जमा करना होगा।
कॉलेज प्रबंधन ने खराब मूल्यांकन के आरोपों से बचने और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए यह भी तय किया है कि पूरक परीक्षा की उत्तरपुस्तिकाओं की जांच बाहरी शिक्षकों से करवाई जाएगी। इस प्रक्रिया में Devi Ahilya University की सहायता ली जाएगी, ताकि re-evaluation प्रक्रिया पारदर्शी और विश्वसनीय हो। यह कदम supplementary exam results के संबंध में उठाई गई शिकायतों पर एक ठोस प्रतिक्रिया है।
प्राचार्य का बयान: बड़ी संख्या में फेल होने पर आंतरिक मूल्यांकन
प्राचार्य डॉ. अशोक सचदेवा ने इस मामले पर अपनी बात रखते हुए कहा कि सामान्यतः पूरक परीक्षा की कॉपियों को दोबारा नहीं जांचा जाता है। हालांकि, इस बार बड़ी संख्या में छात्राओं के अनुत्तीर्ण होने के कारण यह एक असाधारण स्थिति है। इसी को देखते हुए, कॉलेज ने आंतरिक मूल्यांकन करवाने का निर्णय लिया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि छात्राओं द्वारा फॉर्म भरने के बाद ही उनकी कॉपियों की जांच प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इस Indore college के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण स्थिति है, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
आगे क्या?
अब सभी की निगाहें बुधवार तक छात्राओं द्वारा फॉर्म जमा करने और उसके बाद शुरू होने वाली पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि बाहरी शिक्षकों द्वारा की गई जांच के बाद छात्राओं के परिणामों में क्या बदलाव आता है और क्या इससे उन्हें न्याय मिल पाएगा।
