इंदौर, मध्य प्रदेश: इंदौरियों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि जब पर्यावरण संरक्षण की बात आती है, तो उनका संकल्प अटल होता है। लगातार तीसरे वर्ष, शहर ने सफलतापूर्वक ‘नो कार डे’ (No Car Day) का आयोजन किया, जिससे सड़कों पर वाहनों की संख्या में उल्लेखनीय कमी देखी गई और प्रदूषण के स्तर में महत्वपूर्ण सुधार हुआ। यह पहल एक Sustainable City बनने की दिशा में इंदौर के प्रयासों को उजागर करती है।
सड़कों पर कम वाहन, पर्यावरण को राहत
सोमवार को मनाए गए ‘नो कार डे’ के दौरान, सामान्य दिनों के मुकाबले शहर की सड़कों पर लगभग 30 प्रतिशत कारें और अन्य बड़े वाहन कम नजर आए। पेट्रोल पंपों पर भी वाहनों की लंबी कतारें नहीं दिखीं, जो इस पहल की सफलता का प्रमाण है। इस एक दिन के लिए, इंदौर की सड़कें शांत और हवा कुछ हद तक स्वच्छ महसूस हुई।
ईंधन की भारी बचत और कार्बन उत्सर्जन में कमी
इस पहल का सबसे बड़ा सकारात्मक प्रभाव ईंधन की खपत पर पड़ा। इंदौर पेट्रोल-डीजल पंप ओनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राजिंदरसिंह वासु के अनुसार, सोमवार को करीब एक लाख लीटर पेट्रोल और 80 हजार लीटर डीजल की खपत कम हुई। यह Fuel Conservation का एक शानदार उदाहरण है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पूर्व विज्ञानी दिलीप वाघेला ने बताया कि पेट्रोल की खपत कम होने से शहर में 2,31,000 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम हुआ, जबकि डीजल की खपत कम होने से 2,14,400 किलोग्राम डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम हुआ। कुल मिलाकर, ‘नो कार डे’ पर शहर में एक ही दिन में 4,45,400 किलोग्राम यानी 445.4 मेट्रिक टन Carbon Emission कम हुआ। यह आंकड़ा Environmental Protection के प्रति इंदौर की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
नेतृत्व ने भी पेश की मिसाल
इस ‘नो कार डे’ को सफल बनाने में शहर के प्रमुख अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने भी सक्रिय भूमिका निभाई। महापौर पुष्यमित्र भार्गव अपने निवास से साइकिल चलाकर पलासिया चौराहा पर आयोजित साइक्लोथॉन रैली में शामिल हुए। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के कुलगुरू राकेश सिंघाई भी उनके साथ साइकिलिस्ट के रूप में मौजूद थे।
निगमायुक्त दिलीप कुमार यादव ने भी ई-बस में सवार होकर ट्रेचिंग ग्राउंड और सिटी फारेस्ट का निरीक्षण किया। संभागायुक्त सुदाम खाड़े और कलेक्टर शिवम वर्मा ई-स्कूटर से अपने कार्यालय पहुंचे, जबकि न्यायमूर्ति विवेक रूसिया पैदल ही हाई कोर्ट पहुंचे। इन सभी अधिकारियों ने ‘नो कार डे’ का स्वागत करते हुए इसे पर्यावरण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
महापौर का संदेश: एक दिन का बदलाव, बड़े प्रभाव का आधार
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने उन लोगों के सवालों का जवाब दिया जो पूछते हैं कि एक दिन कार नहीं चलाने से क्या होगा। उन्होंने कहा, “मैं लोगों से पूछता हूं कि एक दिन कार नहीं चलाएंगे तो क्या होगा।” उन्होंने बताया कि ‘नो कार डे’ मनाकर इंदौर ने एक दिन में करीब पौने दो लाख लीटर ईंधन बचाया है और 445 मेट्रिक टन कार्बन उत्सर्जन कम किया है। ये आंकड़े बताते हैं कि एक दिन कार नहीं चलाकर भी हम शहर के वातावरण को शुद्ध करने में कितना योगदान दे सकते हैं। यह Indore No Car Day सिर्फ एक दिन की पहल नहीं, बल्कि एक बड़े बदलाव की शुरुआत है।
आगे की राह: हरित भविष्य की ओर
इंदौर ने लगातार तीसरे वर्ष ‘नो कार डे’ मनाकर न केवल अपने नागरिकों को पर्यावरण के प्रति जागरूक किया है, बल्कि देश के अन्य शहरों के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण स्थापित किया है। यह पहल दर्शाती है कि सामूहिक प्रयास और प्रशासनिक सहयोग से एक बड़ा सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। इंदौर का यह कदम एक स्वच्छ और हरित भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।
