असम के दिलों पर राज करने वाले प्रसिद्ध गायक Zubeen Garg की सिंगापुर में हुई संदिग्ध मृत्यु ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। उनकी असमय मौत के बाद से ही रहस्य गहराता जा रहा है, और अब लोग खुले तौर पर न्याय की मांग कर रहे हैं। विपक्ष भी इस मामले में सक्रिय हो गया है और CBI investigation की मांग तेजी से उठ रही है।
Zubeen Garg की संदिग्ध मौत: क्यों उठ रही है CBI जांच की मांग?
24 सितंबर 2025 को सिंगापुर में मशहूर गायक Zubeen Garg की हुई संदिग्ध मौत पर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं। असम में विपक्षी दल इस घटना को एक गहरी साजिश का हिस्सा मान रहे हैं और इसे लेकर CBI investigation की मांग तेज हो गई है। आरोपों में कहा गया है कि Zubeen Garg की यात्रा दबाव में हुई थी, आयोजकों ने विरोधाभासी बयान दिए हैं, और तो और, सबूतों में भी गड़बड़ी का शक है। असम विधानसभा में विपक्ष के नेता देवव्रत सैकिया ने इस संबंध में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर मामले की उच्च-स्तरीय जांच की मांग की है, ताकि इस Singapore mystery से पर्दा उठ सके।
विपक्षी दलों के संगीन आरोप और सबूतों में हेरफेर का शक
देवव्रत सैकिया ने अपने पत्र में स्पष्ट रूप से कहा है कि Zubeen Garg की मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई है और इसमें साजिश के पर्याप्त सबूत मौजूद हैं। उन्होंने लिखा, “असम के सांस्कृतिक प्रतीक Zubeen Garg की मृत्यु आकस्मिक नहीं लगती। यह घटना विदेशी धरती पर हुई है, जिसमें क्षेत्राधिकार संबंधी बाधाएं हैं। ऐसे में CID या SIT जांच पर्याप्त नहीं होगी, उससे न्याय की उम्मीद नहीं है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि केवल CBI और उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की निगरानी में जांच से ही इंसाफ मिल सकता है।
सैकिया ने कई सनसनीखेज दावे किए हैं। उनका कहना है कि यात्रा से पहले Zubeen Garg ने अपने करीबी सहयोगियों को बताया था कि वे स्वेच्छा से नहीं, बल्कि भारी दबाव में विदेश जा रहे हैं। आरोप है कि उन्हें अपनी सामान्य यात्रा पद्धति बदलने के लिए मजबूर किया गया। इस Assam singer को सीमित साथियों के साथ भेजा गया, जिससे गवाहों की संख्या न्यूनतम रहे और आयोजकों की जवाबदेही सीमित हो जाए। यह सब एक Conspiracy theory की ओर इशारा करता है, जिससे शक गहराता है कि उनकी मौत महज हादसा नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश हो सकती है।
आयोजकों पर सवाल: विरोधाभासी बयान और सीमित गवाह
इस मामले में सबसे बड़ा विवाद ‘पूर्वोत्तर भारत महोत्सव’ के आयोजक श्यामकानु महंत को लेकर है। विपक्ष का आरोप है कि उनके बयान विरोधाभासी हैं, जिससे संदेह और बढ़ गया है। इससे पहले असम सरकार ने श्यामकानु महंत पर राज्य में किसी भी समारोह या आयोजन पर प्रतिबंध लगा दिया था। यह भी ध्यान देने योग्य है कि वे कोई सामान्य व्यक्ति नहीं हैं; वे पूर्व डीजीपी भास्कर ज्योति महंत के छोटे भाई हैं, जो फिलहाल असम राज्य सूचना आयोग के मुख्य सूचना आयुक्त हैं। उनके एक और भाई नानी गोपाल महंत गुवाहाटी विश्वविद्यालय के कुलपति रह चुके हैं, जो इस मामले को और भी संवेदनशील बना देता है।
सत्ता के गलियारों से जुड़े तार और जनहित याचिका
असम जातीय परिषद और रायजोर दल जैसे विपक्षी दल भी लगातार CBI investigation की मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि विदेशी धरती पर हुई मौत की जांच सीआईडी जैसी राज्य एजेंसी नहीं कर सकती। एजेपी के अध्यक्ष लुरिनज्योति गोगोई ने स्पष्ट किया, “विदेशी धरती पर हुई मौत की जांच करने का अधिकार केवल CBI के पास है। हम सरकार से CBI जांच की मांग करते हैं।” इस मामले को लेकर गुवाहाटी हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका भी दाखिल की गई है, जिसमें कोर्ट से मामले की जांच अदालत की निगरानी में कराने की मांग की गई है। इस Singapore mystery को सुलझाने के लिए न्यायिक हस्तक्षेप आवश्यक है।
जनता का गुस्सा और न्याय की पुकार
जनता का गुस्सा इस बात को लेकर भी है कि Zubeen Garg, जो हमेशा खुद को सिर्फ इंसान कहते थे और जाति-धर्म से ऊपर रहते थे, उनकी मौत के बाद भी राजनीति और सत्ता के खेल हावी होते दिख रहे हैं। उनकी Zubeen Garg death ने एक ऐसे मुद्दे को जन्म दिया है, जहां लोग न्याय और सच्चाई की मांग कर रहे हैं, भले ही इसके पीछे कितनी भी गहरी साजिश क्यों न हो। इस असम singer के प्रशंसकों और न्याय चाहने वालों को उम्मीद है कि उन्हें जल्द न्याय मिलेगा।



