वैश्विक स्तर पर डायबिटीज के बढ़ते मामले स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बने हुए हैं। यह सिर्फ ब्लड शुगर बढ़ने की स्थिति नहीं है, बल्कि यह हृदय, किडनी, आंखों और तंत्रिकाओं से संबंधित कई गंभीर समस्याओं का खतरा भी काफी बढ़ा देती है। दुखद है कि भारतीय आबादी भी तेजी से इस खतरनाक रोग की चपेट में आ गई है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि भारत को ‘डायबिटीज कैपिटल’ तक कहा जाने लगा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि डायबिटीज के कुछ ऐसे प्रकार भी हैं जिनकी चर्चा कम होती है और अक्सर उनकी सही पहचान भी नहीं हो पाती?
कम चर्चित और अक्सर गलत पहचाना जाने वाला: Type 1.5 डायबिटीज (LADA)
डायबिटीज के प्रकारों में Type 1.5 डायबिटीज (LADA – Latent Autoimmune Diabetes in Adults) के बारे में सबसे कम चर्चा होती है, यही कारण है कि अक्सर लोगों में इसका सही निदान भी नहीं हो पाता है। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह Type 1 डायबिटीज का ही एक सबटाइप है और आमतौर पर 30 वर्ष से अधिक आयु वालों में इस समस्या का निदान होता है। गौर करने वाली बात यह भी है कि इसके अधिकतर लक्षण Type 2 डायबिटीज की तरह ही हो सकते हैं। यानी यह एक हाइब्रिड रूप है, जिसे पहचानना और समय पर इलाज करना और भी मुश्किल हो जाता है। ऐसे लोगों को भी इंसुलिन इंजेक्शन की आवश्यकता होती रह सकती है। यह बीमारी धीरे-धीरे शरीर में विकसित होती है और अक्सर Diabetes in India के बढ़ते बोझ में इसका योगदान अनदेखा रह जाता है।
Type 2 डायबिटीज से भ्रम और ‘Misdiagnosis’ की चुनौती
अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन (एडीए) और यूरोपियन एसोसिएशन फॉर द स्टडी ऑफ डायबिटीज (ईएएसडी) के एक ताजा शोध अध्ययन के अनुसार, LADA की शुरुआत में लक्षण Type 2 डायबिटीज से मिलते-जुलते होते हैं। कई मरीजों को शुरुआत में Type 2 का रोगी मानकर दवाइयां दी जाती हैं, लेकिन बाद में स्थिति बिगड़ने पर असली कारण सामने आता है। यही वजह है कि इस बीमारी को ‘Misdiagnosis डिजीज’ भी कहा जाता है। रिपोर्ट बताती है कि Type 1.5 Diabetes वाले मरीजों में ब्लड शुगर लंबे समय तक असंतुलित रहता है। ऐसे में हृदय रोग, किडनी डैमेज और आंखों की रोशनी प्रभावित होने का खतरा और भी ज्यादा बढ़ जाता है। सही पहचान न होने से मरीजों को सही इलाज मिलने में देरी होती है, जिससे जटिलताएं बढ़ जाती हैं।
Type 1.5 डायबिटीज के लक्षण और पहचान
विशेषज्ञ बताते हैं कि चूंकि Type 1.5 Diabetes के लक्षण अन्य प्रकार के डायबिटीज से मिलते-जुलते होते हैं, इसलिए इसका सही निदान थोड़ा मुश्किल हो जाता है। हालांकि, कुछ सामान्य डायबिटीज के लक्षण हैं जिन पर ध्यान देना आवश्यक है:
- बार-बार प्यास लगना
- अत्यधिक पेशाब आना
- अचानक बिना कारण वजन घटना
- लगातार थकान या कमजोरी महसूस होना
- हल्की भूख के बावजूद ब्लड शुगर का तेजी से बढ़ना
- जख्म या कट लगने पर देर से भरना
- धुंधला दिखाई देने की समस्या
शुगर मॉनिटर करने पर लगातार बढ़ा हुआ ग्लूकोज स्तर डायबिटीज का संकेत होता है जिसको लेकर डॉक्टर की सलाह जरूरी है। सुबह खाली पेट शुगर लेवल 125 एमजी/डीएल से ऊपर और भोजन के बाद 200 एमजी/डीएल से अधिक रहना अलार्मिंग हो सकता है।
विशेषज्ञों की राय: भारत में LADA का बढ़ता प्रभाव
एम्स के एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. विवेक अग्रवाल का कहना है कि भारत में मधुमेह की एक विशाल आबादी है और इसमें से 5-10 प्रतिशत मरीज LADA से पीड़ित हो सकते हैं। समस्या यह है कि अधिकांश मामलों में इसे Type 2 मानकर इलाज किया जाता है। अगर समय रहते सही पहचान हो जाए तो मरीज गंभीर जटिलताओं से बच सकते हैं। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में कुल 10 करोड़ से अधिक डायबिटीज के मरीज हैं, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा इन अनदेखे प्रकारों से भी प्रभावित हो सकता है।
एक और रहस्यमय प्रकार: Type 5 डायबिटीज
दुनियाभर के तमाम विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य संस्थाओं से डायबिटीज के एक सबसे कम चर्चित और उपेक्षित प्रकार – Type 5 Diabetes को औपचारिक रूप से मान्यता देने का आग्रह किया है। माना जाता है कि दुनियाभर में 2.5 करोड़ लोग इससे प्रभावित हैं। यह मुख्य रूप से युवा और दुबले-पतले लोगों को अधिक प्रभावित करती है। एक तरफ जहां Type 2 डायबिटीज के लिए खान-पान में गड़बड़ी (हाई कैलोरी) को प्रमुख कारण माना जाता है, वहीं Type 5 Diabetes पर्याप्त भोजन न करने से शुरू होता है। यानी, यह नई बीमारी मुख्य रूप से उन किशोरों और युवा वयस्कों में देखी जा रही है जिनका वजन कम होता है या जिन्होंने बचपन में गंभीर खाद्य असुरक्षा का अनुभव किया है क्योंकि कुपोषण उनकी इंसुलिन स्रावित करने की क्षमता को प्रभावित करता है। यह एक गंभीर मुद्दा है जिस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।
निष्कर्ष
डायबिटीज एक जटिल बीमारी है और इसके कई प्रकार हो सकते हैं, जिनमें से Type 1.5 Diabetes (LADA) और Type 5 Diabetes कम ज्ञात हैं। इन ‘छिपे’ हुए प्रकारों के बारे में जागरूकता बढ़ाना और सही समय पर Misdiagnosis से बचना बेहद महत्वपूर्ण है। यदि आपको डायबिटीज के कोई भी लक्षण महसूस होते हैं या आपके ब्लड शुगर का स्तर लगातार बढ़ा हुआ रहता है, तो तुरंत किसी विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लें और सही निदान व उपचार कराएं। आपकी जागरूकता ही बेहतर स्वास्थ्य की कुंजी है।
