उत्तर प्रदेश की राजनीति के प्रमुख चेहरों में से एक, प्रतापगढ़ की कुंडा सीट से विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया, इन दिनों अपनी निजी ज़िंदगी को लेकर सुर्खियों में हैं। उनकी पत्नी भानवी सिंह के साथ चल रहे Raja Bhaiya divorce विवाद में अब एक नया मोड़ आ गया है। पहली बार उनके बेटे शिवराज प्रताप सिंह ने इस पूरे मामले पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी है, और उनकी यह प्रतिक्रिया अपनी मां के खिलाफ है।
मां भानवी सिंह पर बेटे शिवराज के गंभीर आरोप
शिवराज प्रताप सिंह का बयान ऐसे समय आया है जब उनकी मां भानवी सिंह ने राजा भैया पर ‘जनसंहारक हथियार’ रखने जैसे संगीन आरोप लगाए हैं और प्रधानमंत्री कार्यालय में शिकायत तक कर दी है। इन Bhanvi Singh allegations के जवाब में, शिवराज ने अपनी मां को ही कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक विस्तृत पोस्ट में खुलासा किया कि उनके माता-पिता (मम्मा और दाऊ) पिछले करीब 10 वर्षों से अलग रह रहे हैं। उन्होंने बताया कि परिवार के बड़ों के कहने पर कुछ समय के लिए राजा भैया और भानवी सिंह बच्चों की खातिर एक छत के नीचे रहे, लेकिन उनके संबंध कभी सामान्य नहीं थे।
शिवराज प्रताप सिंह के अनुसार, “मम्मा ने दाऊ को बिना बताए घर छोड़ दिया और दिल्ली के एक मकान में रहने लगीं।” जब बच्चे बड़े हो गए, तो राजा भैया ने अदालत में तलाक की अर्जी दाखिल की। शिवराज का आरोप है कि तभी से संपत्ति और रुपयों की चाह में उनकी मां ने सोशल मीडिया से लेकर मीडिया तक में राजा भैया की ‘badvertisement’ (बदनामी) शुरू कर दी। उन्होंने सौ करोड़ रुपये मांगने समेत कई गंभीर आरोप लगाए हैं।
‘महिला कार्ड’ और ‘विक्टिम कार्ड’ खेलने का दावा
अपने पोस्ट में, शिवराज प्रताप सिंह ने अपनी मां पर ‘महिला कार्ड’ और ‘विक्टिम कार्ड’ के जरिए लोगों को सोशल मीडिया पर भड़काने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि “फर्जी पोस्ट करना बहादुरी का काम नहीं है।” शिवराज ने यह भी बताया कि उनकी मां के इसी स्वभाव के चलते न केवल राजा भैया, बल्कि उनके अपने माता-पिता, सास-ससुर, चचेरे भाई-बहन और यहां तक कि वे दोनों भाई भी उनसे बात नहीं करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भानवी सिंह ने यहां रहते हुए नौकरों को मारा-पीटा और उन पर कई मुकदमे भी किए हैं। यह पूरा Family dispute अब अदालत के बजाय सोशल मीडिया पर लड़ा जा रहा है, जिस पर शिवराज ने आपत्ति जताई।
पिता राजा भैया के बचाव में उतरे बेटे
शिवराज ने अपने पिता राजा भैया का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने (दाऊ) हम सबका अच्छा भरण-पोषण किया, अच्छी शिक्षा दी, धर्म-संस्कार और अपार स्नेह दिया। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि राजा भैया ने इस विषय पर सार्वजनिक तौर पर अब तक कुछ नहीं कहा है और शायद कहेंगे भी नहीं, इसलिए उन्हें यह लिखना पड़ रहा है। शिवराज ने दुख व्यक्त किया कि उनकी मां बदले की भावना में इतनी बह गई हैं कि उन्हें अपने बच्चों का भविष्य, खासकर बेटियों की शादी तक की चिंता नहीं है।
संपत्ति के विवाद पर शिवराज ने चौंकाने वाला दावा किया कि उनकी मां के पास राजा भैया से अधिक अचल संपत्ति है और वे आराम का जीवन जी रही हैं। वे कोर्ट में महंगे से महंगा वकील खड़ा कर रही हैं और कई वर्षों तक राजा भैया से कहीं अधिक इनकम टैक्स भी भरा है। शिवराज ने अपनी मां के ‘एजेंडे’ पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस प्रकार की बेकार पोस्ट से किसी भी केस में मदद नहीं मिलेगी, बल्कि यह केवल राजा भैया को एक जन प्रतिनिधि के तौर पर बदनाम करने की कोशिश है।
कोर्ट में मुकदमा लड़ने की अपील
अंत में, शिवराज प्रताप सिंह ने अपनी मां से अपील की कि वे अपनी ऊर्जा अदालत में मुकदमा लड़ने में लगाएं, न कि सोशल मीडिया पर। उन्होंने आशा व्यक्त की कि उनकी इस पोस्ट के बाद उन्हें इस विषय पर और कुछ न लिखना पड़े। यह Family dispute अब एक नए मोड़ पर आ गया है, जहां अगली प्रतिक्रिया का इंतजार है।



