राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने पूर्वी दिल्ली के New Ashok Nagar इलाके में अवैध रूप से चल रहे बोरवेल के खिलाफ सख्त रुख अख्तियार किया है। यह कदम भूजल के अत्यधिक दोहन और पर्यावरण नियमों के उल्लंघन को रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। NGT ने पूर्वी दिल्ली के उपायुक्त (राजस्व) को दिल्ली जल बोर्ड (DJB) द्वारा भेजी गई शिकायत पर दो महीने के भीतर गहन जांच कर कानूनी कार्रवाई करने का आदेश दिया है। यह आदेश ऐसे समय में आया है जब पूरे देश में जल संरक्षण और groundwater exploitation को रोकने की जरूरत महसूस की जा रही है।
क्या है मामला?
मामला 2019 का है, जब न्यू अशोक नगर के सी-ब्लॉक में सार्वजनिक सड़कों पर बने एक illegal borewell को एसडीएम ने सील कर दिया था। हालांकि, याचिकाकर्ता ने NGT को बताया कि स्थानीय निवासियों ने इस सील को तोड़कर बोरवेल को फिर से चालू कर दिया है। इस गंभीर उल्लंघन पर अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई थी, जिसके बाद याचिकाकर्ता ने NGT का दरवाजा खटखटाया।
NGT का कड़ा आदेश
NGT में सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि अवैध बोरवेल न केवल भूजल का अनियंत्रित दोहन कर रहे हैं, बल्कि water conservation और पर्यावरण संरक्षण के नियमों का भी खुला उल्लंघन हैं। NGT ने इस बात पर जोर दिया कि भले ही याचिकाकर्ता ने अवैध बोरवेल चलाने वाले व्यक्तियों के नाम न बताए हों, लेकिन DJB द्वारा Deputy Commissioner (Revenue) को भेजी गई शिकायत पर समयबद्ध तरीके से कार्रवाई करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। अधिकरण ने स्पष्ट किया कि East Delhi के अधिकारी इस मामले को गंभीरता से लें और तय समय सीमा में कार्रवाई रिपोर्ट पेश करें।
शिकायत की पूरी कहानी
याचिकाकर्ता ने इस संबंध में सबसे पहले 4 फरवरी 2025 को दिल्ली जल बोर्ड को शिकायत भेजी थी। दिल्ली जल बोर्ड ने इस शिकायत को आगे बढ़ाते हुए 27 फरवरी 2025 को पूर्वी दिल्ली के उपायुक्त (राजस्व) को भेजा था। हालांकि, याचिकाकर्ता के अनुसार, इस शिकायत पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। NGT के इस आदेश से अब उम्मीद जगी है कि New Ashok Nagar में अवैध रूप से चल रहे बोरवेल पर लगाम लग सकेगी और जल संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित होगा। यह आदेश दर्शाता है कि पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ NGT कितनी गंभीरता से कार्रवाई कर रहा है।



