इंदौर के सबसे बड़े अस्पताल, `MY Hospital Indore`, में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। एक नवजात बच्चे की चूहे के काटने से हुई मौत के बाद न्याय की मांग को लेकर `Jayas organization` ने रविवार को अस्पताल परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। यह घटना प्रशासन की घोर लापरवाही और `medical negligence` पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
धार जिले के रूपापाड़ा गांव के रहने वाले देवाराम और मंजू, उस अभागे दंपत्ति में से थे, जिनकी बच्ची की जान एनआईसीयू में चूहे के काटने के कारण चली गई। उनकी नवजात बच्ची, जिसने अभी दुनिया ठीक से देखी भी नहीं थी, वह इस लापरवाही की भेंट चढ़ गई। इस `newborn death` ने अस्पताल की व्यवस्था पर उंगलियां उठा दी हैं। दोपहर 12 बजे शुरू हुआ यह प्रदर्शन देर रात तक जारी रहा, जिसमें सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शनकारी अपने हाथों में चूहे द्वारा कुतरी गई नवजात की उंगलियों की तस्वीरों वाली तख्तियां लिए हुए थे, जो इस दर्दनाक घटना की भयावहता को बयां कर रही थीं।
न्याय की मांग में उमड़ा जनसैलाब
प्रदेश भर से आए सैकड़ों कार्यकर्ता अपनी मांगों पर अड़े रहे। अस्पताल प्रशासन के अधिकारी, कलेक्टर कार्यालय से एसडीएस और तहसीलदार सहित कई अधिकारी उन्हें समझाने पहुंचे, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया कि जब तक जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होती, वे पीछे नहीं हटेंगे।
लापरवाही या जानबूझकर की गई हत्या?
जयस के राष्ट्रीय अध्यक्ष लोकेश मुजाल्दा ने इस घटना को सीधे तौर पर ‘गैर इरादतन हत्या’ का मामला बताया। उन्होंने कहा कि नवजात की मौत किसी गंभीर बीमारी से नहीं, बल्कि `rat attack` के कारण हुई है, और इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर मामला दर्ज होना चाहिए। मुजाल्दा ने यह भी आरोप लगाया कि शायद आदिवासी और मुस्लिम परिवारों की बच्चियां होने के कारण इस मामले में जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं हो रही है। यह आरोप प्रशासन की संवेदनहीनता और भेदभावपूर्ण रवैये को उजागर करता है।
और भी मामले, गंभीर सवाल
प्रदर्शन के दौरान केवल इसी घटना का जिक्र नहीं हुआ, बल्कि अस्पताल की अन्य गंभीर लापरवाहियों को भी सामने लाया गया। मुजाल्दा ने बताया कि 19 सितंबर को देवास जिले से एक परिवार अपनी बीमार बेटी को इलाज के लिए यहां लाया था, लेकिन बेड न होने का बहाना बनाकर उन्हें वापस भेज दिया गया। इतना ही नहीं, एंबुलेंस निःशुल्क होने के बावजूद उनसे पैसे लिए गए। इलाज न मिलने के कारण उस बच्ची की भी मौत हो गई। यह घटना `medical negligence` के पैटर्न की ओर इशारा करती है, जहां मरीजों को समय पर और उचित उपचार नहीं मिल पाता।
इस प्रदर्शन में छात्र नेता रवि चौधरी, करणी सेना परिवार के जिला अध्यक्ष ऋषिराज सिंह सिसोदिया, पवन डावर सहित कई अन्य प्रमुख लोग मौजूद रहे, जिन्होंने पीड़ितों के लिए न्याय की आवाज बुलंद की। यह देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले में क्या कार्रवाई करता है और कब तक इन लापरवाहियों पर लगाम लगती है।
