लखनऊ के गोमती नगर में एक दुखद Lucknow suicide की घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। समाजवादी पार्टी के विधायक कविंद्र चौधरी के 27 वर्षीय साले कार्तिकेय शर्मा ने फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। यह घटना मंगलवार देर रात की है, जिसका खुलासा बुधवार सुबह हुआ। कार्तिकेय लंबे समय से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे और परिवार के अनुसार, वे कुछ दिनों से अवसाद से जूझ रहे थे।
घटना का विस्तृत विवरण
विपुल खंड निवासी मृतक Kartikey Sharma सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी डीके चौधरी के भतीजे भी थे। मंगलवार देर रात जब कार्तिकेय अपने कमरे में सोने गए, तो किसी को अंदाजा नहीं था कि अगली सुबह क्या होने वाला है। सुबह लगभग सात बजे जब घर में काम करने वाला रामपाल सफाई करने पहुंचा, तो उसने कार्तिकेय का शव पंखे से बने फंदे में लटका पाया। यह दिल दहला देने वाला दृश्य देखकर उसने तत्काल परिवार के अन्य सदस्यों को सूचना दी। आनन-फानन में परिवार के लोग शव को लेकर लोहिया अस्पताल पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
पुलिस छानबीन के दौरान कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। गोमती नगर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच-पड़ताल की। इंस्पेक्टर ब्रजेश चंद्र तिवारी ने बताया कि पंचायतनामा भरा गया है, लेकिन परिवार ने पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया। परिवारजनों ने स्पष्ट किया है कि कार्तिकेय पिछले कुछ समय से गंभीर depression में थे और इसी वजह से उन्होंने यह कदम उठाया।
प्रतियोगी परीक्षाओं का दबाव और अवसाद के लक्षण
Kartikey Sharma के पिता बलिया में जिला पंचायत में तैनात हैं। कार्तिकेय खुद प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगे थे, जो अक्सर युवाओं पर immense competitive exams stress डालता है। परिवार ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से कार्तिकेय का इलाज भी चल रहा था, जिससे उनके अवसादग्रस्त होने की बात की पुष्टि होती है।
आत्महत्या से पहले की रात कार्तिकेय का व्यवहार असामान्य था। परिवारजन ने बताया कि उन्होंने अपने फोन से सभी सोशल मीडिया अकाउंट डिलीट कर दिए थे। इसके अलावा, वह हर रात अपने पालतू कुत्ते को अपने साथ सोने ले जाते थे, लेकिन मंगलवार रात वह अकेले ही सोए थे, जो उनके बदलते मानसिक स्थिति का संकेत था। यह घटना युवाओं में बढ़ती mental health चुनौतियों और उनके दुष्प्रभावों को उजागर करती है।
पुलिस की जांच और परिवार का फैसला
गोमती नगर पुलिस ने अपनी ओर से छानबीन की है। हालांकि, परिवार के पोस्टमार्टम कराने से इनकार करने के बाद, पुलिस ने आगे की कार्रवाई परिवार की इच्छा के अनुसार की। परिवार ने अवसाद को ही आत्महत्या का मुख्य कारण बताया है।
यह दुखद घटना एक बार फिर हमें युवाओं के mental health और उन पर पड़ने वाले अकादमिक व सामाजिक दबावों पर सोचने के लिए मजबूर करती है। ऐसे समय में, जब युवा प्रतियोगी परीक्षाओं के चक्रव्यूह में फंसे हैं, उनके मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना और उन्हें समय पर सहायता प्रदान करना अत्यंत आवश्यक है।
