हाल ही में इंदौर का कपड़ा बाजार एक गंभीर सामाजिक और राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है, जब भाजपा नेता एकलव्य गौड़ ने ‘लव जिहाद’ का हवाला देते हुए व्यापारियों से मुस्लिम कर्मचारियों को नौकरी से हटाने की अपील की। इस अपील के विरोध में मुस्लिम व्यापारियों और कर्मचारियों ने सड़कों पर उतरकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। उनका कहना है कि राजनीति चमकाने के लिए उनके व्यापार और रोजगार से खिलवाड़ किया जा रहा है।
विवाद की जड़: मुस्लिम कर्मचारियों पर ‘लव जिहाद’ के आरोप
यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब भाजपा विधायक मालिनी गौड़ के पुत्र एकलव्य गौड़ ने Indore के Cloth Market के व्यापारियों के साथ एक बैठक की। इस बैठक में उन्होंने आरोप लगाया कि मुस्लिम कर्मचारी, महिला ग्राहकों और महिला सहकर्मियों से मेलजोल बढ़ाकर ‘लव जिहाद’ को अंजाम देते हैं। उन्होंने व्यापारियों से आग्रह किया कि वे अपनी दुकानों से मुस्लिम कर्मचारियों को तुरंत हटा दें, ताकि ऐसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सके। गौड़ का यह बयान शहर में तेजी से चर्चा का विषय बन गया।
मुस्लिम व्यापारियों और कर्मचारियों का कड़ा विरोध
एकलव्य गौड़ की इस चेतावनी का Muslim employees और व्यापारियों ने पुरजोर विरोध किया। मंगलवार को बड़ी संख्या में मुस्लिम व्यापारी और कर्मचारी हाथों में तख्तियां लेकर बजाजा खाना चौक से राजवाड़ा तक पैदल मार्च पर निकले। उन्होंने अपनी नाराजगी दर्ज कराते हुए कहा कि वे वर्षों से इन दुकानों में काम कर रहे हैं और कभी किसी तरह की शिकायत सामने नहीं आई। प्रदर्शनकारियों का साफ कहना था कि राजनीति चमकाने के लिए उनके व्यापार और रोजगार को निशाना बनाना गलत है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वे पहले भारतीय हैं और हर मुद्दे को हिन्दू-मुस्लिम के चश्मे से देखना गलत है।
एकलव्य गौड़ का पक्ष: इस्लामिक आबादी बढ़ाने की साजिश?
वहीं, अपने बयान पर कायम रहते हुए Eklavya Gaur ने कहा कि Love Jihad के मामले आए दिन सामने आ रहे हैं। उनके अनुसार, मुस्लिम कर्मचारी महिला सहकर्मियों और ग्राहकों को अपने जाल में फंसाकर इस्लामिक आबादी बढ़ाने की साजिश रच रहे हैं। उन्होंने शीतला माता और Cloth Market के व्यापारियों से आग्रह किया है कि वे अपनी दुकानों पर मुस्लिम कर्मचारियों को न रखें ताकि इस तरह के कथित ‘लव जिहाद’ को रोका जा सके।
यह घटना Indore में धार्मिक सद्भाव और व्यापारिक रिश्तों पर गहरा असर डाल रही है। एक ओर जहां ‘लव जिहाद’ को लेकर चिंताएं जताई जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर रोजगार और धार्मिक पहचान के आधार पर भेदभाव के आरोपों ने इस मुद्दे को और भी संवेदनशील बना दिया है। आने वाले दिनों में देखना होगा कि यह विवाद किस दिशा में जाता है और इसका शहर के सामाजिक ताने-बाने पर क्या प्रभाव पड़ता है।



