पिछले सात वर्षों में भारतीय खिलौना उद्योग ने एक अभूतपूर्व परिवर्तन देखा है। आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में उद्योग ने 70% की प्रभावशाली वृद्धि दर्ज की है, जो न केवल आर्थिक मोर्चे पर एक बड़ी उपलब्धि है बल्कि देश की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है। यह वृद्धि केवल संख्याओं का खेल नहीं है, बल्कि गुणवत्ता, नवाचार और वैश्विक पहुंच की एक कहानी है।
‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ का प्रभाव
इस शानदार वृद्धि के पीछे सरकार की दूरदर्शी नीतियां और विशेष रूप से Vocal for Local तथा Atmanirbhar Bharat जैसी पहलें रही हैं। इन अभियानों ने घरेलू उत्पादन को बढ़ावा दिया, स्थानीय निर्माताओं को सशक्त बनाया और उपभोक्ताओं को भारतीय उत्पादों को चुनने के लिए प्रेरित किया। इसका सीधा असर Indian toy industry पर पड़ा, जहां पहले विदेशी खिलौनों का दबदबा था। स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण Make in India toys के निर्माण पर जोर दिया गया, जिससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़े बल्कि हमारे बच्चों के लिए सुरक्षित और सांस्कृतिक रूप से प्रासंगिक खिलौने भी उपलब्ध हुए।
आयात में भारी कमी, निर्यात में जबरदस्त उछाल
इन नीतियों का सबसे बड़ा प्रमाण खिलौनों के आयात और निर्यात के आंकड़ों में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। पिछले सात वर्षों में खिलौनों का आयात 70% तक घट गया है, जो दर्शाता है कि भारत अब अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए विदेशी निर्भरता कम कर रहा है। वहीं, दूसरी ओर, Toy exports में 600% का अविश्वसनीय उछाल दर्ज किया गया है। यह आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि भारतीय खिलौने अब न केवल घरेलू बाजार में अपनी जगह बना रहे हैं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी पहचान कायम कर रहे हैं। भारत तेजी से एक महत्वपूर्ण वैश्विक खिलौना केंद्र के रूप में उभर रहा है।
गुणवत्ता और नवाचार पर जोर
भारतीय खिलौना निर्माताओं ने सिर्फ मात्रा पर नहीं, बल्कि गुणवत्ता और नवाचार पर भी विशेष ध्यान दिया है। सुरक्षा मानकों का पालन करना, बच्चों के विकास के अनुकूल डिजाइनों को अपनाना और रचनात्मकता को बढ़ावा देना अब प्राथमिकता बन गई है। पारंपरिक भारतीय खेलों और कहानियों से प्रेरित खिलौने भी बाजार में आ रहे हैं, जो हमारी संस्कृति को बच्चों तक पहुंचाने में मदद कर रहे हैं। यह नवाचार और गुणवत्ता ही है जिसने भारतीय खिलौनों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धी बनाया है।
भारत बन रहा है वैश्विक खिलौना केंद्र
यह स्पष्ट है कि भारत अब केवल खिलौनों का उपभोक्ता बाजार नहीं रहा, बल्कि एक सशक्त उत्पादक और निर्यातक भी बन गया है। इस गति से आगे बढ़ते हुए, भारत जल्द ही दुनिया के प्रमुख वैश्विक खिलौना केंद्रों में से एक बन सकता है। यह न केवल देश की अर्थव्यवस्था को गति देगा, बल्कि Atmanirbhar Bharat के सपने को साकार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। Indian toy industry का यह उत्थान देश के औद्योगिक विकास की एक चमकदार मिसाल है।
