हर साल लाखों युवा अपने सपनों को पूरा करने के लिए विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होते हैं, लेकिन उनमें से कुछ ही ऐसे होते हैं जो अपनी कड़ी मेहनत और लगन से सफलता की नई इबारत लिखते हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है Indore की Harshita Dave की, जिन्होंने मात्र 22 वर्ष की आयु में MPPSC Topper बनकर न केवल अपने परिवार का, बल्कि पूरे शहर का नाम रोशन किया है। वे अब Deputy Collector के पद पर कार्यभार संभालेंगी। आइए जानते हैं उनकी इस शानदार Success Story के पीछे की यात्रा।
कैसे बनीं MPPSC टॉपर?
मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) द्वारा आयोजित पीसीएस 2024 परीक्षा के परिणामों में, इंदौर की रहने वाली हर्षिता दवे ने शीर्ष स्थान प्राप्त कर सबको चौंका दिया। यह परीक्षा जुलाई 2024 में आयोजित की गई थी, जिसके मुख्य परीक्षा (मेंस) के परिणाम 5 मार्च को घोषित हुए। इसमें सफल हुए 339 उम्मीदवारों को साक्षात्कार (इंटरव्यू) के लिए बुलाया गया था, और उन्हीं में से एक हर्षिता ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। उनका यह प्रदर्शन उन सभी के लिए प्रेरणा है जो सिविल सेवा में अपना करियर बनाना चाहते हैं।
शिक्षा और बचपन से ही तेज दिमाग
हर्षिता की शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी बेहद प्रभावशाली रही है। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सरस्वती शिशु मंदिर और माधव विद्यापीठ से पूरी की। बचपन से ही वे पढ़ाई में तो अव्वल थीं ही, साथ ही एक अंतरराष्ट्रीय डिबेटर (International Debater) भी रह चुकी हैं। उनकी यह बहुमुखी प्रतिभा ही उनकी सफलता की नींव बनी, जिससे उन्हें न केवल ज्ञान प्राप्त हुआ बल्कि आत्मविश्वास भी बढ़ा।
परिवार का सहयोग और प्रेरणा
हर्षिता की इस उपलब्धि में उनके परिवार का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनकी माताजी हिंदी की शिक्षिका हैं, और पिताजी साहित्य अकादमी के निदेशक हैं। ऐसे साहित्यिक और शैक्षणिक माहौल में पली-बढ़ी हर्षिता को हमेशा ही प्रोत्साहन मिला। अपनी बेटी की इस Success Story पर खुशी जाहिर करते हुए उनकी माताजी ने कहा कि बेटियां बेटों से किसी भी मायने में कम नहीं हैं, बल्कि वे पूरे कुल का गौरव बढ़ाती हैं। पिताजी ने भी हर्षिता के मार्गदर्शकों को उनकी सफलता का श्रेय दिया, जो सही मार्गदर्शन के महत्व को दर्शाता है।
पूरे शहर में खुशी की लहर
हर्षिता की इस अद्भुत उपलब्धि से पूरे Indore शहर में उत्साह का माहौल है। हर कोई उनकी प्रशंसा कर रहा है और उनके परिवार को बधाई दे रहा है। हर्षिता दवे ने यह साबित कर दिया है कि लगन, परिश्रम और सही मार्गदर्शन से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। उनकी यह यात्रा उन सभी युवाओं के लिए एक मिसाल है जो अपने सपनों को पूरा करने की ठान चुके हैं और भारत की सिविल सेवाओं में अपना योगदान देना चाहते हैं। Deputy Collector के रूप में उनका यह नया सफर निश्चित रूप से देश और समाज के लिए प्रेरणादायी होगा।
