प्रयागराज में बाघंबरी क्षेत्र श्रीरामलीला कमेटी द्वारा आयोजित भव्य रामलीला दर्शकों के लिए एक अद्भुत अनुभव लेकर आई। तुलसी पार्क स्थित मंचन स्थल पर हुए श्रीराम विवाह के मनमोहक दृश्य ने सभी को भावुक कर दिया। यह Ramleela मंचन अपने आप में एक अविस्मरणीय आयोजन बन गया, जहाँ पौराणिक कथाओं को जीवंत कर दिया गया।
राजा दशरथ की जनकपुर यात्रा
मंच पर जैसे ही राजा दशरथ अपने ऋषियों व मुनियों के साथ भगवान राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के विवाह हेतु जनकपुर के लिए प्रस्थान करते हैं, संगीतमयी प्रस्तुति ‘आई रे बारात जनक जी के द्वारे’ से पूरा वातावरण गूंज उठता है। आतुर निगाहों से बारात को आते देख, राजा जनक अपनी प्रजा संग पुष्पवर्षा कर सभी का गर्मजोशी से स्वागत करते हैं। जैसे ही Ayodhya से राजा दशरथ की बारात जनकपुर पहुंची, हर कोई एकटक राम सहित सभी चारों भाइयों को निहारता रहा। तिलक लगाकर, पांव धुलकर भव्य आरती उतारी गई। राजा जनक रानी के साथ एक-एक कर सभी भाइयों को विवाह मंडप तक लेकर जाते हैं और उन्हें आसन ग्रहण कराते हैं।
मंडप में विवाह की रस्में
तभी महर्षि शतानंद राजा जनक से राजकुमारी Sita को मंडप में बुलाने का आग्रह करते हैं। इसके बाद ‘गाओ री प्रभु मंगल गाओ री’ की संगीतमयी प्रस्तुति से पूरा पंडाल भक्तिमय हो उठता है। विवाह की रस्में विधिवत निभाई जाती हैं। चारों भाई एक-एक कर राजकुमारी Sita सहित अन्य राजकुमारियों को वरमाला डालते हैं। जैसे ही मंच पर वरमाला डालने का यह पावन दृश्य मंचित होता है, सामने उपस्थित दर्शकों का समूह ‘सियावर रामचंद्र की जय’ और ‘जय श्रीराम, जय-जय श्रीराम’ के उद्घोष से पूरे Prayagraj को गुंजायमान कर देता है। तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा वातावरण उत्साहित हो उठता है। ‘सिया रघुवर संग वरण लागी’ की संगीतमयी प्रस्तुति के बीच, सिंहासन पर बैठे राजा दशरथ बारात संग और राजा जनक अपनी रानी व प्रजा के साथ चारों भाइयों पर पुष्पवर्षा करते हैं। विधिविधान के साथ चारों भाई सात फेरा लगाने की रस्म पूरी करते हैं, यह Ram Vivah का भव्य मंचन था।
लेजर शो और भावुक विदाई
फिर दृश्य बदलता है, दो मिनट के लिए अंधेरा छा जाता है। उसके बाद एक शानदार लेजर शो के बीच राजा जनक के दरबार में धुआं उठता देख हर कोई प्रसन्न नजर आता है। सीता की विदाई से पहले, दोनों राजा एक-दूसरे को गले लगाते हैं। चारों भाई और उनकी पत्नियां दोनों राजाओं का पैर छूकर आशीर्वाद लेती हैं। इन भावुक कर देने वाले लम्हों में विदाई का दृश्य दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देता है और कई आँखें नम हो जाती हैं। फिर राजा जनक के दरबार में ‘रामजी से पूछे जनकपुरी के नारी बता दा बबुला’ की संगीतमयी प्रस्तुति होती है, जो विदाई के माहौल को और भी मार्मिक बना देती है। इस Ramleela ने एक बार फिर साबित किया कि सांस्कृतिक विरासतें कैसे पीढ़ी दर पीढ़ी को जोड़ती हैं।



