दिल्ली, जो दिन के उजाले में अपनी रफ्तार और ऊर्जा के लिए जानी जाती है, वही राष्ट्रीय राजधानी रात के अंधेरे में एक गंभीर चुनौती का सामना कर रही है। शहर की अधिकांश स्ट्रीटलाइट्स या तो खराब हैं या पूरी तरह से निष्क्रिय पड़ी हैं, जिससे दिल्ली की सड़कें रात में असुरक्षित हो गई हैं। यह न केवल यातायात को खतरनाक बना रहा है, बल्कि अपराधों को भी बढ़ावा दे रहा है, जो शहर के विकास और आम जनजीवन पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है।
अंधेरे में डूबी राजधानी की सड़कें: बढ़ते हादसे और अपराध
दिल्ली में रात के समय सड़कों को रोशन करने के लिए लगाई गई हजारों स्ट्रीटलाइट्स में से ज्यादातर बस शोभा की वस्तु बनकर रह गई हैं। दिल्ली की सड़कों पर लगी Delhi Streetlights की यह खराब स्थिति यातायात को बेहद असुरक्षित बनाती है, जिससे दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ जाता है। लोग देर शाम ऐसी सड़कों पर निकलने से कतराते हैं, जिसका सीधा असर दिल्ली की आर्थिक गतिविधियों, नाइटलाइफ़ और पर्यटन पर पड़ रहा है।
दिल्ली पुलिस के 2024-25 के सर्वेक्षण के अनुसार, रात्रिकालीन अपराधों में चौंका देने वाली 18 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इन अपराधों में से अधिकांश ऐसी सड़कों पर हुए, जहाँ या तो स्ट्रीटलाइट्स खराब थीं या बिल्कुल नहीं थीं। यह आँकड़ा दिल्ली में अपराध की बढ़ती दर और खराब बुनियादी ढाँचे के बीच सीधा संबंध दर्शाता है। सड़कों पर पर्याप्त रोशनी न होने से Public Safety गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है, खासकर महिलाओं की सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा बन गई है। यह स्थिति शहर में Crime in Delhi के बढ़ने का एक प्रमुख कारण बन गई है।
विकास की राह में रोड़ा और प्रभावित क्षेत्र
राजधानी में खराब स्ट्रीटलाइट्स की यह समस्या विकास की गति पर ब्रेक लगा रही है। यमुनापार, बाहरी दिल्ली, कालकाजी एक्सटेंशन, करोल बाग, छतरपुर, शरद विहार, मयूर विहार और राजा गार्डन जैसे कई इलाकों में, बिना स्ट्रीटलाइट वाली सड़कें रात के अंधेरे में किसी खतरे से कम नहीं हैं। यह स्थिति स्पष्ट रूप से व्यवस्था की विफलता का प्रमाण है और शहरी बुनियादी ढाँचा (Urban Infrastructure) में सुधार की तत्काल आवश्यकता को उजागर करती है।
व्यवस्था की विफलता: कौन है जिम्मेदार?
दिल्ली में लगभग तीन लाख स्ट्रीटलाइट पोल पर छह लाख से ज़्यादा लाइट पॉइंट हैं, जिनकी देखरेख लोक निर्माण विभाग (PWD), नगर निगम (MCD), नई दिल्ली नगर निगम (NDMC) और डिस्कॉम जैसी विभिन्न एजेंसियों के पास है। आरोप है कि इनमें से 20 से 30 प्रतिशत लाइटें खराब या निष्क्रिय हैं। यह आंकड़ा दिल्ली में Road Safety Delhi के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है और एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी को भी दर्शाता है।
महिला सुरक्षा और सड़क दुर्घटनाओं पर गंभीर खतरा
खराब स्ट्रीटलाइट्स के कारण अंधेरे में डूबी सड़कें विशेष रूप से महिलाओं की सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा पैदा करती हैं। इन परिस्थितियों में अकेले यात्रा करना बेहद असुरक्षित महसूस होता है। इसके साथ ही, रात के अंधेरे में सड़कों पर पर्याप्त रोशनी न होने के कारण सड़क दुर्घटनाओं की दर भी चिंताजनक स्तर पर पहुँच गई है। यह एक ऐसा मुद्दा है जिस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।
समाधान की दिशा में कदम: एक विशेष अभियान
इस गंभीर समस्या के प्रति जागरूकता बढ़ाने और संबंधित एजेंसियों व विभागों को जवाबदेह ठहराने के लिए, एक प्रमुख समाचार संस्थान छह दिवसीय विशेष अभियान शुरू कर रहा है। इस अभियान का उद्देश्य स्ट्रीटलाइट्स के कुप्रबंधन, खराब गुणवत्ता और उनके कारण होने वाली बाधाओं पर प्रकाश डालना है। यह अभियान न केवल समस्या को उजागर करेगा, बल्कि सुधार के उपायों और सरकारी स्तर पर किए जा रहे प्रयासों पर भी केंद्रित होगा, ताकि दिल्ली की सड़कों को एक बार फिर रोशन किया जा सके और Public Safety सुनिश्चित हो सके।



