राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली-NCR में साफ हवा में सांस लेने की राहत अब खत्म होने वाली है। मानसून की वापसी और हवा की बदलती दिशा के साथ ही, प्रदूषण का खतरा एक बार फिर मंडराने लगा है। तमाम प्रतिबंधों के बावजूद, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में पराली जलाने की घटनाओं में तेजी आई है, जिससे आने वाले दिनों में हवा की गुणवत्ता ‘खराब’ श्रेणी में पहुंचने की आशंका है।
क्यों बढ़ रहा है दिल्ली-NCR में प्रदूषण?
हालिया आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक हफ्ते में पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में पराली जलाने की 63 घटनाएं सामने आई हैं। यह चिंताजनक इसलिए है क्योंकि हवा की दिशा अब उत्तर-पश्चिम की ओर हो गई है। इसका सीधा मतलब है कि पराली का धुआं अब सीधे दिल्ली-NCR की तरफ बढ़ेगा, जिससे यहां के निवासियों को smog और धुंध का सामना करना पड़ सकता है। यह stubble burning वायु प्रदूषण का एक प्रमुख कारण है।
मानसून की विदाई और GRAP की आहट
जैसे-जैसे दक्षिण-पश्चिम मानसून देश के उत्तरी हिस्सों से विदा हो रहा है, वैसे-वैसे हवा की दिशा भी उत्तर-पश्चिम की ओर मुड़ गई है। मौसम विज्ञानियों के अनुसार, यह हवा न केवल हिमालय की ठंडक लाती है, बल्कि पंजाब और हरियाणा से पराली जलाने का धुआं भी साथ लाती है। इसके अलावा, राजस्थान, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आने वाली धूल भी इसी दिशा से दिल्ली-NCR तक पहुँचती है। इस स्थिति को देखते हुए, ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) को 1 अक्टूबर की निर्धारित तिथि से पहले ही लागू करना पड़ सकता है। यह प्लान air quality को नियंत्रित करने के लिए महत्वपूर्ण है।
वर्तमान स्थिति और भविष्य की चिंताएं
वर्तमान में, दिल्ली-NCR में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 100 से ऊपर, ‘मध्यम’ श्रेणी में है। हालांकि, पर्यावरणविदों का मानना है कि महीने के आखिरी हफ्ते तक यह AQI 200 के पार होकर ‘खराब’ श्रेणी में पहुँच सकता है। इससे श्वसन संबंधी बीमारियां बढ़ने का खतरा पैदा हो सकता है। यह Delhi-NCR pollution एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती है।
पराली जलाने की घटनाओं का कारण
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. विनय सहगल बताते हैं कि पंजाब में पराली जलाना अधिक आम है क्योंकि वहां के किसान धान और गेहूं के बीच आलू और मटर जैसी वैकल्पिक फसलों की खेती करना चाहते हैं। धान की कटाई के बाद खेत को अगली फसल के लिए जल्दी तैयार करने हेतु वे पराली जला देते हैं, जो एक बड़ी पर्यावरणीय समस्या है।
आगे की राह
यह स्पष्ट है कि दिल्ली-NCR में स्वच्छ हवा का संकट एक बार फिर गहरा रहा है। पराली जलाने पर सख्त नियंत्रण, प्रभावी GRAP लागू करना और किसानों को पराली प्रबंधन के वैकल्पिक तरीके उपलब्ध कराना ही इस चुनौती से निपटने का एकमात्र रास्ता है। हम सभी को मिलकर इस smog की समस्या से लड़ना होगा और अपनी air quality को सुधारना होगा।



