उच्च कोलेस्ट्रॉल को अक्सर सेहत के लिए कई प्रकार से खतरनाक माना जाता रहा है, और यह हृदय रोगों का एक प्रमुख कारण भी है। एक-दो दशक पहले तक `Cholesterol` बढ़ने को उम्र के साथ होने वाली समस्या के तौर पर देखा जाता था, लेकिन आजकल की बदलती जीवनशैली और खान-पान की आदतों ने इसके जोखिमों को कम उम्र के लोगों में भी बढ़ा दिया है। हालांकि, `Cholesterol` के बारे में एक ऐसी बात है जिसे बहुत कम लोग जानते हैं – यह सिर्फ आपके रक्त में ही नहीं, बल्कि आपके दिमाग में भी बेहद अहम भूमिका निभाता है।
कोलेस्ट्रॉल: सिर्फ एक ‘खराब फैट’ नहीं
जब हम `Cholesterol` शब्द सुनते हैं, तो अक्सर इसे एक ‘बैड फैट’ समझकर डर जाते हैं। ब्लड टेस्ट रिपोर्ट में बढ़ा हुआ `Blood Cholesterol` देखकर `Heart Disease` का खतरा बताया जाता है। लेकिन यह बात पूरी तरह से सही नहीं है। सच तो यह है कि शरीर का लगभग 20 से 25% `Cholesterol` दिमाग में होता है और यह हमारे ब्रेन में बेहद अहम रोल निभाता है। `Brain Cholesterol` हमारी याददाश्त, सोचने-समझने की क्षमता और नई चीजें सीखने की प्रक्रिया को भी नियंत्रित करता है।
मस्तिष्क के लिए क्यों ज़रूरी है `Brain Cholesterol`?
यह ब्रेन के लिए बेहद ज़रूरी है क्योंकि यह न्यूरॉन्स (तंत्रिका कोशिकाओं) की झिल्लियों (मेम्ब्रेन) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनता है। ये झिल्लियाँ शरीर के बाकी हिस्सों को सिग्नल ट्रांसमिशन यानी जानकारी भेजने और प्राप्त करने में मदद करती हैं। इसके अलावा, ब्रेन में `Cholesterol` से मायलिन शीथ बनती है, जो नर्व फाइबर्स को सुरक्षित रखती है। शोध बताते हैं कि ब्रेन का `Cholesterol` शरीर के अन्य हिस्सों से अलग तरीके से बनता और उपयोग होता है। इसकी कमी से मानसिक थकान, याददाश्त में कमी, डिप्रेशन जैसी `Mental Health` से जुड़ी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए, सही मात्रा में `Brain Cholesterol` का होना आवश्यक है, लेकिन इसका असंतुलन भी नुकसान कर सकता है।
`Blood Cholesterol` और `Brain Cholesterol` में अंतर
`Brain Cholesterol` और `Blood Cholesterol` का स्रोत, उपयोग और प्रभाव सब अलग होते हैं। ब्रेन का `Cholesterol` मुख्यतः दिमाग में ही बनता है और सीधे खून से उसमें बहुत कम जाता है। इसके विपरीत, `Blood Cholesterol` लिवर में बनता है और आहार से भी मिलता है। `Brain Cholesterol` न्यूरॉन्स को सुरक्षित रखने, मायलिन शीथ बनाने और मानसिक कार्यों में मदद करता है, जबकि `Blood Cholesterol` हार्मोन निर्माण, कोशिका मरम्मत और ऊर्जा के लिए ज़रूरी होता है। वैज्ञानिक अध्ययन बताते हैं कि ब्रेन में मौजूद `Cholesterol` का संतुलन `Mental Health` से जुड़ा है, जबकि खून में बढ़ा हुआ `Blood Cholesterol` `Heart Disease` का प्रमुख कारण बनता है। दोनों के बीच अलग-अलग कार्य हैं, लेकिन असंतुलन होने पर शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं।
दोनों प्रकार के `Cholesterol` को संतुलित रखने के आसान उपाय
अपने आहार, नियमित व्यायाम और मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना आवश्यक है ताकि `Blood Cholesterol` और `Brain Cholesterol` दोनों संतुलित बने रहें। शोध के अनुसार, जीवनशैली में छोटे बदलाव भी `Cholesterol` को संतुलित रखने में मदद कर सकते हैं। अपने खान-पान में स्वस्थ वसा (healthy fats) शामिल करें, प्रोसेस्ड फूड्स से बचें और शारीरिक रूप से सक्रिय रहें। नियमित जांच करवाकर समय रहते `Blood Cholesterol` के स्तर को नियंत्रित करने से `Heart Disease` और स्ट्रोक जैसे गंभीर खतरों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। अपनी `Mental Health` का भी ख्याल रखें, क्योंकि इसका सीधा संबंध `Brain Cholesterol` के संतुलन से है।



