मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में ‘जानलेवा’ कोल्ड्रिफ कफ सिरप पीने से बच्चों की दर्दनाक मौत के मामले ने पूरे देश को झकझोर दिया है। इस गंभीर घटना के बाद, पुलिस प्रशासन ने अब सख्त कदम उठाए हैं। बच्चों की मौत के जिम्मेदार श्रीसन फार्मास्युटिकल (Shreesan Pharmaceutical) कंपनी के फरार मालिकों पर इनाम घोषित कर दिया गया है और उनकी गिरफ्तारी के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। यह घटना भारत में drug safety India को लेकर गंभीर सवाल उठाती है और नियामक प्रणालियों की समीक्षा की आवश्यकता पर जोर देती है।
फरार मालिकों पर 20 हजार का इनाम और SIT का गठन
पुलिस ने इस संवेदनशील मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए, श्रीसन फार्मास्युटिकल कंपनी के फरार मालिकों की जानकारी देने या उनकी गिरफ्तारी में मदद करने वाले किसी भी व्यक्ति को 20,000 रुपये का नकद इनाम देने की घोषणा की है। छिंदवाड़ा जोन के पुलिस उप महानिरीक्षक (DIG) राकेश कुमार सिंह ने स्पष्ट किया कि सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी ताकि लोग बिना किसी डर के जानकारी साझा कर सकें। इसके साथ ही, आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) भी गठित किया गया है। पुलिस हर संभव प्रयास कर रही है ताकि इस हृदय विदारक मामले में न्याय सुनिश्चित हो सके। यह Chhindwara cough syrup deaths के पीड़ितों के लिए न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
तमिलनाडु सरकार पर लापरवाही का आरोप
इस दुखद घटना ने न केवल स्वास्थ्य विभाग बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा दी है। मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने इस मामले में तमिलनाडु सरकार पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि उनके राज्य में 20 बच्चों की मौत दूषित कफ सिरप पीने से हुई है और इसके लिए तमिलनाडु सरकार सीधे तौर पर जिम्मेदार है। मंत्री पटेल के अनुसार, राज्य से बाहर भेजी जाने वाली दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा की जांच करना तमिलनाडु सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी थी। उन्होंने यह भी बताया कि मध्य प्रदेश सरकार भी राज्य में आने वाली दवाओं की रैंडम जांच (random inspection) करती है, लेकिन यह Coldrif syrup संयोगवश जांच से छूट गया। यह घटना Madhya Pradesh health crisis के रूप में उभर रही है, जिस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।
मंत्री पटेल ने आगे कहा कि हर दवा के बैच के लिए ‘सर्टिफिकेट ऑफ एनालिसिस’ (COA) जारी होना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि तमिलनाडु सरकार ने कहां गलती की? क्या COA जारी हुआ था या नहीं? कौन अधिकारी जिम्मेदार है, यह गहन जांच का विषय है। ऐसी जहरीली दवाएं राज्य से कैसे बाहर गईं, यह गंभीर लापरवाही का मामला है जिस पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
‘कोल्ड्रिफ’ सिरप: मिलावटी पाए गए सैंपल, उत्पादन बंद
जिस ‘कोल्ड्रिफ’ कफ सिरप को लेकर यह पूरा विवाद खड़ा हुआ है, उसे तमिलनाडु के कांचीपुरम जिले की एक दवा कंपनी, श्रीसन फार्मास्युटिकल (Shreesan Pharmaceutical) द्वारा बनाया गया था। तमिलनाडु के खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन विभाग ने 4 अक्टूबर को पुष्टि की कि कंपनी की सुंगुवरचत्रम स्थित यूनिट से लिए गए सैंपल मिलावटी पाए गए थे। इन गंभीर निष्कर्षों के बाद, कंपनी को तुरंत उत्पादन रोकने के आदेश जारी किए गए। इस पूरे प्रकरण ने drug safety India के मानकों पर सवाल खड़े कर दिए हैं और यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि भविष्य में ऐसी त्रासदियां न हों।
निष्कर्ष: न्याय की उम्मीद और भविष्य की चुनौतियां
छिंदवाड़ा में बच्चों की मौत का यह मामला न केवल एक स्थानीय त्रासदी है बल्कि पूरे देश में दवा सुरक्षा और गुणवत्ता नियंत्रण की आवश्यकता पर बल देता है। पुलिस और प्रशासन द्वारा की जा रही कार्रवाई न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन यह घटना हमें यह भी सिखाती है कि दवा कंपनियों और नियामक निकायों को अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से लेना होगा ताकि मासूम जिंदगियों को बचाया जा सके। उम्मीद है कि फरार आरोपियों को जल्द ही पकड़ लिया जाएगा और पीड़ितों को न्याय मिल पाएगा, साथ ही ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।



