संगीत जगत को झकझोर कर रख देने वाली खबर के बाद, असम के चहेते Singer और सांस्कृतिक प्रतीक, Zubeen Garg को आज राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। उनके निधन से पूरे देश, खासकर असम में शोक की लहर है। हालांकि, इस दुखद विदाई के बीच, जुबिन के असामयिक निधन पर उठे सवालों ने एक नए रहस्य को जन्म दिया है, जिसके चलते दूसरे पोस्टमार्टम और सिंगापुर में जांच का फैसला लिया गया है।
राजकीय सम्मान के साथ जुबिन गर्ग की भावुक विदाई
23 सितंबर, 2025 को जुबिन गर्ग का अंतिम संस्कार असम के कमरकुची गांव, सोनापुर में किया गया। इस भावुक क्षण के गवाह बनने के लिए हजारों की संख्या में प्रशंसक और शुभचिंतक उमड़े पड़े। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा और केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने इस मौके पर दिवंगत गायक को श्रद्धांजलि अर्पित की। पुलिस के कड़े सुरक्षा घेरे और फैंस के ‘जय जुबिन दा’ के नारों के बीच उनके पार्थिव शरीर को श्मशान घाट ले जाया गया। गायक को अंतिम सम्मान देने के लिए उनके पैरों की छाप भी ली गई, जो उनकी अद्वितीय विरासत को दर्शाता है।
निधन पर गहराया रहस्य: दूसरे पोस्टमार्टम का फैसला और सिंगापुर जांच
जुबिन गर्ग का निधन 19 सितंबर, 2025 को सिंगापुर में स्कूबा डाइविंग के दौरान हुई एक दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना में हुआ था। उनके निधन के बाद से ही कुछ अनसुलझे सवाल उठ रहे थे। इसी कड़ी में एक बड़ा मोड़ तब आया जब असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंता बिस्वा शर्मा ने गायक के दूसरे पोस्टमार्टम की घोषणा की। यह पोस्टमार्टम गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (जीएमसीएच) में एम्स गुवाहाटी की विशेषज्ञ टीम की मौजूदगी में किया गया। मुख्यमंत्री के अनुसार, सिंगापुर से प्राप्त मृत्यु प्रमाण पत्र में मौत का कारण डूबना बताया गया था, जो पहले की पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मेल नहीं खाता था। मूल कारण को समझने के लिए ही यह दूसरा पोस्टमार्टम का निर्णय लिया गया है।
इस मामले की तह तक जाने के लिए असम पुलिस की एक टीम जल्द ही सिंगापुर का दौरा करेगी। सिंगापुर पुलिस के साथ समन्वय में, असम पुलिस वीडियो फुटेज और अन्य प्रासंगिक सामग्री एकत्र करेगी, ताकि मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सके। यह जांच एक जटिल प्रक्रिया होगी क्योंकि इसमें अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता है।
जनसैलाब और अमर यादें
जुबिन गर्ग का Funeral एक ऐतिहासिक घटना बन गया। अपने प्रिय कलाकार को अंतिम विदाई देने के लिए उमड़ी प्रशंसकों की अभूतपूर्व भीड़ के कारण, जुबिन गर्ग की अंतिम यात्रा को अब लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स द्वारा दुनिया भर में चौथी सबसे बड़ी जनसभा के रूप में आधिकारिक तौर पर मान्यता दी गई है। यह उनके प्रशंसकों के अटूट प्रेम और सम्मान का प्रमाण है। जुबिन की पत्नी गरिमा सैकिया, परिवार, और यहां तक कि उनके पालतू कुत्ते ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के अलावा, भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक ने भी गायक को श्रद्धांजलि अर्पित की, जो उनकी वैश्विक अपील को दर्शाता है। गुवाहाटी की सड़कों पर उनके अमर गीत ‘मायाबिनी’ की धुनें गूंजती रहीं, जो हर किसी की आंखों में आंसू ला रही थीं।
जुबिन की विरासत: स्मारक और अनूठी पहचान
जुबिन गर्ग सिर्फ एक Singer नहीं थे, बल्कि असम की सांस्कृतिक पहचान का एक अभिन्न हिस्सा थे। उनके निधन के बाद, राज्य सरकार ने उनकी स्मृति में दो स्मारक बनाने की योजना की पुष्टि की है – एक कमरकुची में उनके दाह संस्कार स्थल पर और दूसरा जोरहाट में, जो उस क्षेत्र के साथ जुबिन के गहरे संबंधों को दर्शाता है। ये स्मारक उनकी विरासत को जीवित रखेंगे और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेंगे।
जुबिन गर्ग का जाना असम के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनके निधन पर उठे सवाल भले ही अभी अनुत्तरित हों, लेकिन उनका संगीत और उनकी स्मृति हमेशा Assam और उनके करोड़ों प्रशंसकों के दिलों में अमर रहेगी।



