आज से शक्ति की भक्ति का महापर्व Shardiya Navratri आरंभ हो गया है। पूरे देश में, विशेषकर मालवा-निमाड़ क्षेत्र में, नौ दिनों तक चलने वाले इस उत्सव का उल्लास छाया हुआ है। सुबह से ही मंदिरों और घरों में शास्त्रोक्त विधि से घटस्थापना और पूजन का क्रम शुरू हो गया है। श्रद्धालु नंगे पैर चलकर माता के दरबार में पहुंच रहे हैं, कृपामयी देवी की वंदना में लीन हैं। इन नौ दिनों में आस्था का उजास चहुंओर फैलेगा, और जन-मन भक्ति के भावों से ओत-प्रोत रहेगा।
शक्ति की भक्ति का महापर्व: शारदीय नवरात्र का आरंभ
माता के आंगन में श्रद्धा के पुष्पों से भक्त भगवती के चरणों में शीश नवा रहे हैं। प्रमुख Mata Mandir और शक्तिपीठों में भक्तों के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। प्रतिदिन प्रातः व संध्या आरती के साथ माता का मनोहारी शृंगार किया जा रहा है और नए आभूषण अर्पित किए जा रहे हैं। यह नौ दिवसीय अनुष्ठान भक्तों को आध्यात्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है। हर साल की तरह इस बार भी Shardiya Navratri पर भक्तों का उत्साह चरम पर है।
माता टेकरी, देवास: जहाँ दो बहनें करती हैं वास
देवास में स्थित माता टेकरी एक ऐसा पवित्र स्थान है, जहाँ तुलजा भवानी और चामुंडा माता एक साथ विराजमान हैं। इन्हें बहनें भी कहा जाता है। चामुंडा माता पवार राजपरिवार की कुलदेवी हैं, जबकि तुलजा भवानी होलकर राजवंश की कुलदेवी मानी जाती हैं। मान्यता है कि यहीं पर सती के रक्त की बूंदें गिरी थीं, जिससे यह स्थान ‘रक्तपीठ’ के नाम से भी जाना जाता है। माता की मूर्तियां पहाड़ की चट्टानों में ही उत्कीर्ण हैं, जो इसकी प्राकृतिक भव्यता को बढ़ाती हैं। नवरात्र के पहले दिन सुबह माता तुलजा भवानी और चामुंडा माता मंदिर में घटस्थापना कार्यक्रम संपन्न हुआ। प्रतिदिन शृंगार के साथ प्रातः व संध्या आरती होती है। इस वर्ष माता तुलजा भवानी को चांदी का मुकुट और चामुंडा माता को स्वर्ण कड़े अर्पित किए गए हैं। इन नौ दिनों में लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं, खासकर सप्तमी और अष्टमी को भीड़ अत्यधिक होती है। Shardiya Navratri के दौरान पूरी रात मंदिर के पट खुले रहते हैं, जिससे भक्त देर रात तक माता के दर्शन कर सकें। यह एक महत्वपूर्ण Mata Mandir है।
उज्जैन का हरसिद्धि शक्तिपीठ: अद्वितीय जागरण परंपरा
देश के 52 Shaktipeeth में से एक, उज्जैन के हरसिद्धि मंदिर में भी नवरात्र का उल्लास छाया हुआ है। सोमवार सुबह पांच बजे ब्रह्म मुहूर्त में घट स्थापना हुई। यहां प्रतिदिन माता का दिव्य शृंगार किया जाता है और शाम को दीपमालिका प्रज्वलित होती है, जिसके बाद संध्या आरती की जाती है। इस मंदिर की एक अद्वितीय परंपरा है कि नौ दिनों तक शयन आरती नहीं होती है। पुजारी रामचंद्र गिरि ने बताया कि पूजन परंपरा में प्रतिदिन सुबह सूर्योदय के समय मंगला, सूर्यास्त के समय संध्या तथा रात्रि 11 बजे शयन आरती होती है। लेकिन नवरात्र के नौ दिन सुबह व शाम की आरती अपने समय व विधिविधान से होती है, लेकिन रात्रिकालीन आरती में शयन के मंत्र नहीं बोले जाते हैं। इसका अर्थ है कि माता नौ दिन जागती हैं और रात्रि में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। यह परंपरा अनादिकाल से चली आ रही है। इसके अलावा, दीपमालिका प्रज्वलित करने की परंपरा मराठाकालीन है और करीब 350 साल से निभाई जा रही है। Harsiddhi Temple की यह अनूठी परंपरा भक्तों को खूब आकर्षित करती है।
नलखेड़ा का मां बगलामुखी मंदिर: तंत्र साधना का विशेष केंद्र
आगर-मालवा जिले के नलखेड़ा में स्थित मां बगलामुखी मंदिर भी Shardiya Navratri के दौरान विशेष आकर्षण का केंद्र होता है। लखुंदर नदी के किनारे स्थित यह मंदिर त्रिशक्ति मां बगलामुखी का धाम है, जहाँ मध्य में मां बगलामुखी, दाएं मां लक्ष्मी तथा बाएं मां सरस्वती विराजित हैं। मान्यता यह भी है कि मां बगलामुखी की मूर्ति स्वयंभू है और यह महाभारतकालीन है। कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर पांडवों ने यहां मां बगलामुखी की आराधना की थी। ईस्वी सन् 1816 में मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया था। Baglamukhi Temple में शारदीय नवरात्र के दौरान देश के कई स्थानों के साथ ही विदेशों से भी माता भक्त यहां पहुंचते हैं। विजय प्राप्ति और शत्रु बाधाओं से मुक्ति के लिए यहां तंत्रोक्त हवन, अनुष्ठान भी किए जाते हैं। प्रथम दिवस पीतांबरा सेवा समिति द्वारा छप्पन भोग लगाकर नौ दिवसीय नि:शुल्क भंडारे का आयोजन किया जा रहा है। संस्कृति विभाग द्वारा सोमवार शाम 6:30 बजे से शक्ति पर्व का आयोजन किया जा रहा है, जिसके तहत लोक गायन और नृत्य नाटिका प्रस्तुत की जाएगी। यह Mata Mandir तंत्र साधना के लिए भी प्रसिद्ध है।
इस प्रकार, Shardiya Navratri का महापर्व पूरे देश में भक्ति और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। ये नौ दिन भक्तों के लिए शक्ति, समृद्धि और शांति प्राप्त करने का स्वर्णिम अवसर हैं।



