दशरथनंदन श्रीराम का वही आदर्श, माता सीता का अद्वितीय समर्पण, लक्ष्मण की भ्रातृसेवा, भरत का त्याग और संकटमोचन हनुमान जी की वीरता… और लंकानरेश रावण का अहंकार। रामायण का यह जीवंत स्वरूप हमें हर साल Ramlila में देखने को मिलता है। सदियों पुरानी यह कथा और उसकी अनादिकाल से चली आ रही परंपराएं, हर बार नई प्रस्तुति के तरीके से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं। प्रयागराज में Ramlila 2025 की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं, और इस वर्ष शहर की रामलीला कमेटियां कुछ बेहद खास और रोमांचक प्रस्तुतियों के साथ दर्शकों का इंतजार कर रही हैं।
श्रीपथरचट्टी रामलीला में रावण वध का अद्भुत मंचन
इस वर्ष श्रीपथरचट्टी रामलीला कमेटी ‘कथा रामराज की’ के अंतर्गत रावण वध का दृश्य बिल्कुल अनूठा होगा। मंच पर तकनीक और कला का ऐसा अद्भुत समन्वय देखने को मिलेगा कि दर्शक अचंभित रह जाएंगे। जी हाँ, आपने सही समझा! यहाँ अन्य कमेटियों की तरह सिर्फ रावण के पुतले का दहन नहीं होगा, न ही रावण वध की कोई साधारण लीला होगी। इस मंचन में दर्शकों को रावण का सिर धड़ से अलग होता दिखाई पड़ेगा, जो श्रीराम के हर बाण पर कटेगा और फिर जुड़ जाएगा। यह प्रयोग श्रीपथरचट्टी रामलीला कमेटी के रामबाग प्रांगण में देखने को मिलेगा। अंत में, विभीषण की सलाह पर श्रीराम रावण की नाभि पर तीर मारकर उनका वध करेंगे। रावण का मंच पर इस प्रकार वध होते देखना हर दर्शक के लिए एक अद्भुत और कौतुहलपूर्ण क्षण होगा। कमेटी के प्रवक्ता लल्लूलाल ‘सौरभ’ बताते हैं कि मंच पर प्राचीन परंपरा को जीवंत किया जा रहा है। अभी तक लोग जो दृश्य टीवी पर देखते थे, उसे मंच पर साक्षात देखने को मिलेगा। Ravana Vadh, भरत-मिलाप जैसे दृश्य देख हर कोई भक्तिभाव से ओतप्रोत हो जाएगा। यह प्रस्तुति Hindu Mythology को आधुनिक रूप देगी।
अन्य कमेटियों की भव्य रावण दहन परंपराएं
प्रयागराज में श्रीपथरचट्टी के अलावा अन्य रामलीला कमेटियाँ भी अपनी-अपनी विशिष्ट परंपराओं और भव्य आयोजनों के साथ Ramlila 2025 में शिरकत कर रही हैं:
श्रीमहंत बाबा हाथीराम पजावा रामलीला कमेटी
इस कमेटी का Ravana Vadh भव्य और आकर्षक होगा। प्राचीन परंपराओं के साथ आधुनिकता का दर्शन भी देखने को मिलेगा। शाहगंज राम मंदिर से भगवान श्रीराम व लक्ष्मण की भव्य शोभायात्रा निकलेगी, जो विभिन्न मार्गों से होते हुए मीरापुर स्थित बरगद घाट पहुँचेगी। वहाँ श्रीराम रावण के 15 फीट के पुतले पर तीर मारकर उसका दहन करेंगे। रामलीला के निर्देश सचिन गुप्ता के अनुसार, रावण के पुतला दहन के बाद भगवान का गाजे-बाजे और ध्वज-पताका के साथ विजय जुलूस निकाला जाएगा। इसके बाद एकादशी तिथि पर श्रीराम-भरत मिलाप की लीला होगी।
श्रीदारागंज रामलीला कमेटी
प्राचीन सभ्यता व परंपरा की प्रतीक श्रीदारागंज रामलीला कमेटी की रामलीला में भी परंपरागत तरीके से Ravana Vadh होता है। विजया दशमी पर भगवान श्रीराम की सवारी श्रृंगार भवन से उठकर निराला मार्ग होते हुए अलोपीबाग फोर्ट मैदान जाएगी। वहाँ रावण वध की लीला परंपरागत तरीके से की जाएगी। इसमें श्रीकटरा रामलीला कमेटी के भगवान श्रीराम भी शामिल होंगे, और फिर दारागंज के भगवान रावण के पुतले का दहन करेंगे। कमेटी के अध्यक्ष कुल्लू यादव कहते हैं कि रावण वध लीला हो या भरत मिलाप और राजगद्दी समारोह, हर दृश्य भावपूर्ण व परंपरा पर आधारित है। इसके जरिए हम लोगों को उनके धर्म व संस्कृति से जोड़ने का प्रयास करेंगे।
बाघम्बरी क्षेत्र श्री रामलीला कमेटी अल्लापुर
बाघम्बरी क्षेत्र श्री रामलीला कमेटी अल्लापुर का Ravana Vadh विजयादशमी के दिन कराया जाएगा। अल्लापुर लेबर चौराहा स्थित लीला मंचन स्थल पर श्रीराम रावण की सेना व सगे-संबंधियों का वध करेंगे। अंत में रावण वध की लीला होगी, जहाँ रावण का 50 फीट का विशाल पुतला बनाया जाएगा, जिसका दहन श्रीराम अपनी तीर से करेंगे। रावण पुतला दहन होने के बाद पटाखा फोड़कर खुशी मनाई जाएगी। कमेटी के अध्यक्ष ओम नारायण त्रिपाठी के अनुसार, रावण के पुतले का दहन कराने के साथ हर सामाजिक कुरीतियों का अंत करने का संकल्प दिलाया जाएगा। लोगों को स्वदेशी वस्तुएं अपनाने और मां-बहनों की रक्षा करने का संकल्प भी दिलाया जाएगा। यह सिर्फ एक Cultural Festival नहीं बल्कि एक सामाजिक प्रेरणा का माध्यम भी है।
निष्कर्ष
प्रयागराज की ये Ramlilaएँ न केवल मनोरंजन का साधन हैं, बल्कि हमारी सदियों पुरानी परंपराओं, Hindu Mythology और आस्था को जीवंत रखने का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी हैं। Ramlila 2025 में Ravana Vadh के ये अनोखे और भव्य आयोजन निश्चित रूप से दर्शकों के मन में भक्ति और रोमांच का अद्भुत संचार करेंगे।


