उत्तर प्रदेश के प्रयागराज शहर में स्वास्थ्य सेवाएं उस वक्त चरमरा गईं, जब स्वरूपरानी नेहरू (SRN) अस्पताल के डॉक्टरों ने अचानक हड़ताल का ऐलान कर दिया। यह हड़ताल मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के एक जूनियर डॉक्टर के साथ हुई मारपीट की घटना के विरोध में की गई है। इस हड़ताल से ट्रामा सेंटर समेत कई महत्वपूर्ण विभागों में मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। डॉक्टरों की यह लामबंदी पुलिस की कथित निष्क्रियता के खिलाफ है और वे दोषियों पर तत्काल कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। इस Prayagraj doctors strike ने पूरे शहर का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
क्या है पूरा मामला?
घटना तीन दिन पहले की है, जब मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर अनुराग के साथ कुछ अज्ञात लोगों ने मारपीट की। जानकारी के अनुसार, डॉक्टर अनुराग को उनके आवास पर एक पार्सल डिलीवरी का बहाना बनाकर बुलाया गया था। जैसे ही वे पार्सल लेने नीचे पहुंचे, वहां पहले से मौजूद तीन-चार लोगों ने उन्हें घेर लिया और बेरहमी से पिटाई कर दी। आरोप है कि हमलावर एक फॉर्च्यूनर और एक बलेनो कार में आए थे, जिन पर कोई नंबर प्लेट नहीं थी। मारपीट के बाद हमलावर धमकी देते हुए फरार हो गए। इस घटना से चिकित्सा समुदाय में गहरा आक्रोश है, और इसे doctor assaulted के एक गंभीर मामले के रूप में देखा जा रहा है।
पुलिस पर निष्क्रियता का आरोप और डॉक्टरों का विरोध
डॉक्टर अनुराग ने घटना के बाद जार्जटाउन थाने में तहरीर दी थी और 112 डायल पुलिस को भी सूचित किया था। हालांकि, डॉक्टरों का आरोप है कि शिकायत के 24 घंटे से अधिक बीत जाने के बाद भी पुलिस ने कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया और न ही कोई ठोस कार्रवाई की। पुलिस की इस कथित निष्क्रियता से नाराज होकर मंगलवार रात करीब साढ़े 11 बजे SRN Hospital के डॉक्टर अचानक हड़ताल पर उतर आए। उन्होंने इलाज का बहिष्कार करते हुए अस्पताल परिसर में धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। रात 12 बजे अस्पताल की लाइट भी चली गई, जिस पर प्रदर्शनकारी डॉक्टरों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने जानबूझकर बिजली कटवाई है, लेकिन इसके बावजूद अंधेरे में उनका प्रदर्शन जारी रहा।
मरीजों पर आफत और स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल
डॉक्टरों की इस अचानक हड़ताल से मरीजों पर जैसे आफत आ गई है। ट्रामा सेंटर, इमरजेंसी और अन्य विभागों में इलाज पूरी तरह ठप हो गया है। गंभीर बीमारियों से जूझ रहे और दुर्घटनाओं के शिकार होकर ट्रामा सेंटर पहुंच रहे मरीजों को बिना इलाज के लौटना पड़ रहा है। तीमारदार भी अपने मरीजों की बिगड़ती हालत को देखकर परेशान हैं। डॉक्टरों का कहना है कि जब तक दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक उनकी हड़ताल जारी रहेगी। यह स्थिति Medical negligence के गंभीर आरोप और Patient care को लेकर बड़े सवाल खड़े करती है।
पुलिस और प्रशासन का आश्वासन
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और अस्पताल प्रशासन हरकत में आ गया है। एसीपी कर्नलगंज राजीव कुमार ने बताया कि पीड़ित डॉक्टर की तहरीर पर जार्जटाउन थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि संदिग्धों की तलाश में पुलिस टीमें छापेमारी कर रही हैं और जल्द ही दोषियों को पकड़ा जाएगा। मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. वीके पांडेय ने भी पुलिस अधिकारियों से बात कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करवाने की उम्मीद जताई है। प्रशासन डॉक्टरों को समझाने और हड़ताल खत्म करवाने की कोशिशों में जुटा है, लेकिन डॉक्टर अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं।



