बीकानेर, राजस्थान। हाल ही में राजस्थान की सियासत में एक दिलचस्प और गंभीर घटनाक्रम देखने को मिला, जिसने Rajasthan Congress में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष Govind Singh Dotasra के बीकानेर दौरे के ठीक बाद, पार्टी के जिला संगठन महासचिव नितिन वत्सस ने अपने पद से इस्तीफा देकर राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। इस इस्तीफे की वजह बनी ‘भावनात्मक उपेक्षा’ ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे पार्टी के भीतर एक नई political controversy शुरू हो गई है।
डोटासरा का बीकानेर दौरा: रामेश्वर डूडी का हालचाल
दरअसल, Govind Singh Dotasra रविवार को बीकानेर पहुंचे थे। उनके दौरे का मुख्य उद्देश्य पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी के स्वास्थ्य का हालचाल जानना था। डूडी लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे हैं और उनकी स्थिति को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं में चिंता बनी हुई है। डोटासरा ने डूडी के निवास पर उनके परिवारजनों से मुलाकात की, उनके स्वास्थ्य के बारे में विस्तार से जानकारी ली और उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हुए हर संभव सहायता का आश्वासन भी दिया। इस मुलाकात के तुरंत बाद डोटासरा सीकर के लिए रवाना हो गए।
नितिन वत्सस का इस्तीफा: ‘भावनात्मक उपेक्षा’ की वजह
डोटासरा के बीकानेर से रवाना होने के कुछ ही घंटों बाद, जिला संगठन महासचिव नितिन वत्सस ने जिला अध्यक्ष यशपाल गहलोत को अपना इस्तीफा सौंप दिया। उनके इस अचानक कदम ने Bikaner News में सनसनी फैला दी। वत्सस ने अपने पत्र में स्पष्ट तौर पर अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए लिखा कि डोटासरा का रामेश्वर डूडी के निवास पर जाना स्वागत योग्य था, लेकिन डूडी के घर से कुछ ही दूरी पर पूर्व शहर अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता जनार्दन कल्ला का निवास है। हाल ही में जनार्दन कल्ला की पत्नी सावित्री देवी का निधन हुआ था, और ऐसे में संगठन के मुखिया का वहां शोक व्यक्त करने न जाना उन्हें ‘भावनात्मक उपेक्षा’ जैसा महसूस हुआ।
‘संगठन के मुखिया को सुख-दुख में शामिल होना चाहिए’
नितिन वत्सस ने अपने इस्तीफे में आगे लिखा, ‘जनार्दन कल्ला ने लंबे समय तक Rajasthan Congress की सेवा की है और मुश्किल दौर में भी पार्टी का झंडा बुलंद रखा है। ऐसे वरिष्ठ नेता के निवास पर शोक व्यक्त करने न जाना निराशाजनक है।’ उन्होंने जोर देकर कहा कि संगठन के मुखिया को अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं के सुख-दुख में शामिल होना चाहिए। इस कथित उपेक्षा से उन्हें गहरा आघात पहुंचा है और वे अब महासचिव के पद पर रहकर काम नहीं कर सकते। हालांकि, वत्सस ने यह भी स्पष्ट किया कि वे एक साधारण कार्यकर्ता के रूप में पार्टी के लिए अपना योगदान देते रहेंगे। यह Nitin Vatsas Resignation ने पार्टी के भीतर एक नई बहस छेड़ दी है, जिससे आने वाले दिनों में और राजनीतिक गहमागहमी बढ़ने की उम्मीद है।
हरीश चौधरी ने किया ‘घावों पर मरहम’ लगाने का काम
इसी बीच, मध्य प्रदेश कांग्रेस प्रभारी और पूर्व राजस्व मंत्री हरीश चौधरी भी रविवार को बीकानेर पहुंचे। उन्होंने पहले रामेश्वर डूडी से मिलकर उनके स्वास्थ्य और उपचार की जानकारी ली। इसके बाद वे सीधे जनार्दन कल्ला के निवास पर गए और वहां बीडी कल्ला तथा जनार्दन कल्ला से मुलाकात कर सावित्री देवी के निधन पर शोक संवेदना व्यक्त की। हरीश चौधरी के इस कदम को पार्टी के भीतर डोटासरा के दौरे से उपजी political controversy के ‘घावों पर मरहम’ लगाने के तौर पर देखा जा रहा है। Bikaner News अपडेट्स में यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो दर्शाता है कि पार्टी के भीतर मतभेदों को पाटने के प्रयास जारी हैं।



