कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम (P. Chidambaram) के पंजाब में ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ पर दिए गए बयान ने राजनीतिक गलियारों में एक नया बवाल खड़ा कर दिया है। इस संवेदनशील मुद्दे पर विभिन्न राजनीतिक और धार्मिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, जिससे बहस और गरमा गई है।
एसजीपीसी (SGPC) की प्रतिक्रिया: कांग्रेस पर आरोप
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने चिदंबरम के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है, लेकिन यह प्रतिक्रिया समर्थन और आरोप दोनों का मिश्रण है। एसजीपीसी ने चिदंबरम के बयान को सही ठहराते हुए कहा कि ऑपरेशन ब्लू स्टार (Operation Blue Star) एक गलत निर्णय था और इसे टाला जा सकता था। एसजीपीसी के महासचिव गुरचरण सिंह ग्रेवाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कांग्रेस शुरू से ही इस मुद्दे पर झूठ बोलती आई है और अब एक नया झूठ फैलाने की कोशिश कर रही है कि इस ऑपरेशन के लिए केवल इंदिरा गांधी जिम्मेदार नहीं थीं। ग्रेवाल ने इस बात पर जोर दिया कि उस समय इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थीं और यह फैसला पूरी तरह से उनका था। उन्होंने चिदंबरम के बयान का स्वागत करते हुए कहा कि अगर उन्होंने यह ईमानदारी से दिया है, तो हम इसकी सराहना करते हैं।
कांग्रेस के भीतर कलह: हाईकमान की नाराजगी
चिदंबरम के बयान से कांग्रेस (Congress Controversy) हाईकमान बेहद नाराज है। पार्टी आलाकमान का मानना है कि वरिष्ठ नेताओं को ऐसे सार्वजनिक बयान देने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए, जिससे पार्टी के लिए शर्मिंदगी पैदा हो सकती है। बार-बार ऐसे बयान पार्टी के लिए समस्याएं खड़ी करते हैं, जो किसी भी स्थिति में उचित नहीं है। कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने तो चिदंबरम के बयान पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि ‘ये तो वही कर रहे हैं जो बीजेपी वाले करते हैं।’ उन्होंने चिदंबरम पर ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ पर सवाल उठाने का आरोप लगाते हुए शक जाहिर किया कि कहीं वे बीजेपी से मिले हुए तो नहीं हैं। अल्वी ने कहा कि ऐसे समय में जब बिहार का चुनाव नजदीक है, इस तरह के बयान कांग्रेस को नुकसान पहुंचाते हैं। उन्होंने सलाह दी कि चिदंबरम को कांग्रेस की 11 साल की उपलब्धियों पर बात करनी चाहिए थी, न कि अपनी ही पार्टी की गलतियों को गिनाना चाहिए।
बीजेपी का समर्थन: ‘राजनीतिक लाभ’ का आरोप
वहीं, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह ने पी. चिदंबरम के बयान का समर्थन किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि ‘ऑपरेशन ब्लैक थंडर’ जैसी रणनीति अपनाकर स्वर्ण मंदिर की पवित्रता को ठेस पहुंचाए बिना आतंकवादियों को आत्मसमर्पण कराया जा सकता था, लेकिन इंदिरा गांधी ने कथित तौर पर राजनीतिक लाभ के लिए टकराव का रास्ता चुना। सिंह ने कहा कि इसका खामियाजा सिख समुदाय को भुगतना पड़ा। उन्होंने 1984 के दंगों (1984 Riots) का जिक्र करते हुए कहा कि दिल्ली में 3,000 से अधिक और पंजाब में 30,000 से ज्यादा सिखों की हत्या एक सुनियोजित राजनीतिक साजिश का परिणाम थी।
चिदंबरम का मूल बयान: एक ‘गलती’ और उसकी ‘कीमत’
गौरतलब है कि चिदंबरम ने शनिवार को हिमाचल प्रदेश के कसौली में एक साहित्यिक कार्यक्रम में यह बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ एक गलती थी और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इस गलती की कीमत अपनी जान देकर चुकाई। उन्होंने यह भी जोड़ा कि सभी आतंकवादियों को पकड़ने के लिए कोई और तरीका हो सकता था, लेकिन ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ गलत तरीका था। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आप इसके लिए पूरी तरह से श्रीमती गांधी को जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते, क्योंकि यह सेना, खुफिया विभाग, पुलिस और नागरिक सुरक्षा एजेंसियों का भी निर्णय था।



