आजकल सोने की चमक हर तरफ है, कीमतें नई ऊंचाइयों को छू रही हैं। जब भी दुनिया में कोई उथल-पुथल होती है, निवेशक सुरक्षित ठिकाने के तौर पर सोने का रुख करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक ऐसा भी दौर था जब एल्युमीनियम की कीमत सोने से कहीं ज्यादा थी? जी हां, एक समय तो ऐसा भी था जब एल्युमीनियम सोने से दोगुना महंगा बिकता था! आज जहां सोना आसमान छू रहा है, वहीं एल्युमीनियम की कीमत लगभग न के बराबर है। आखिर कैसे हुआ यह बड़ा बदलाव?
एल्युमीनियम का स्वर्णिम अतीत
साल 1852 की बात है, उस वक्त एल्युमीनियम की कीमत लगभग 34 डॉलर प्रति औंस थी, जबकि सोना सिर्फ 19 डॉलर प्रति औंस के भाव से बिक रहा था। यानी एल्युमीनियम सोने से लगभग दोगुना महंगा था! उस दौर में एल्युमीनियम एक दुर्लभ धातु मानी जाती थी और इसे शाही धातुओं में शुमार किया जाता था। कल्पना कीजिए, आज जो धातु हमारे घरों में बर्तनों से लेकर हवाई जहाजों तक में इस्तेमाल होती है, वो कभी इतनी कीमती थी कि उसे सिर्फ अमीर लोग ही खरीद पाते थे।
बड़े पैमाने पर उत्पादन की क्रांति
एल्युमीनियम की इस ‘शाही’ स्थिति में बड़ा बदलाव आया 1886 में, जब अमेरिका के चार्ल्स मार्टिन हॉल और फ्रांस के पॉल हेरोल्ट ने अलग-अलग लेकिन लगभग एक ही समय पर एल्युमीनियम के बड़े पैमाने पर उत्पादन की तकनीक विकसित की। इस तकनीक ने एल्युमीनियम को दुर्लभ से सुलभ बना दिया। जैसे ही इसका उत्पादन बड़े पैमाने पर होने लगा, बाजार में इसकी उपलब्धता बढ़ी और कीमतें तेजी से गिरने लगीं। जो एल्युमीनियम कभी 34 डॉलर प्रति औंस था, आज उसकी कीमत महज 0.01 डॉलर प्रति औंस के करीब रह गई है। वहीं सोना अब 3600 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंच चुका है।
सोने का बेजोड़ उछाल
आज के दौर में सोने की कीमत लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 3600 डॉलर प्रति औंस के करीब है। सोने को हमेशा से ही सुरक्षित निवेश माना जाता रहा है। जब भी वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता या संकट का माहौल होता है, निवेशक शेयरों और अन्य अस्थिर संपत्तियों से पैसा निकालकर सोने में लगाते हैं। इसके अलावा, भारत, चीन, तुर्की और पोलैंड जैसे कई देशों के केंद्रीय बैंक भी जमकर सोने की खरीद कर रहे हैं, जिससे इसकी कीमतों में और तेजी आ रही है।
वैश्विक उत्पादन: कौन है आगे?
एल्युमीनियम और सोने, दोनों के उत्पादन में चीन दुनिया में अग्रणी है। चीन दुनिया के कुल एल्युमीनियम उत्पादन का लगभग 57% हिस्सा उत्पादित करता है। इसके बाद भारत, रूस, कनाडा और यूएई का नंबर आता है। वहीं, सोने के उत्पादन में भी चीन पहले स्थान पर है, जिसके बाद रूस और ऑस्ट्रेलिया आते हैं। भारत में सोने का उत्पादन काफी कम है, जबकि खपत बहुत ज्यादा है, इसलिए भारत को अपनी सोने की अधिकांश जरूरतें आयात से पूरी करनी पड़ती हैं।
निष्कर्ष
धातुओं की दुनिया में एल्युमीनियम और सोने की यह कहानी हमें बताती है कि कैसे तकनीकी नवाचार और बाजार की मांग किसी भी वस्तु के मूल्य को पूरी तरह बदल सकती है। एल्युमीनियम का अतीत जहां उसकी दुर्लभता का प्रतीक था, वहीं आज सोना अपनी ‘सुरक्षित पनाह’ वाली छवि के कारण चमक रहा है।



