लखनऊ, उत्तर प्रदेश: `Real estate` से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रॉपर्टी खरीदारों की नींद उड़ा दी है। कानपुर के एक प्रोफेसर की बेशकीमती जमीन `fake Aadhaar registry` और कूटरचित दस्तावेजों के सहारे किसी और के नाम कर दी गई। यह `Lucknow land fraud` दिखाता है कि जालसाज कितने संगठित तरीके से काम कर रहे हैं और आम लोगों की मेहनत की कमाई पर कैसे डाका डाल रहे हैं।
प्रोफेसर की जमीन पर जालसाजों की नजर
कानपुर के किदवईनगर निवासी प्रोफेसर महेंद्र मित्तल, जो कि गर्वमेंट सेंट्रल टेक्सटाइल इंस्टीट्यूट में कार्यरत रहे हैं, ने लखनऊ के बख्शी का तालाब क्षेत्र में अपने और अपनी पत्नी शैलजा के नाम पर दो प्लॉट खरीदे थे। कुछ दिन पहले ही उनके पास एक परिचित का फोन आया, जिसने बताया कि बख्शी का तालाब स्थित उनके प्लॉट पर कुछ लोग काम कर रहे हैं। यह सुनते ही महेंद्र मित्तल के पैरों तले जमीन खिसक गई और वह तुरंत लखनऊ भागे। यहां आकर उन्हें पता चला कि उनके दोनों प्लॉट फर्जी आधार कार्ड और अन्य जाली दस्तावेजों के आधार पर किसी और के नाम ट्रांसफर कर दिए गए हैं।
संगठित गिरोह का हाथ और पुलिसिया कार्रवाई
एक महीने की भागदौड़ और शिकायत के बाद, बीकेटी पुलिस ने तीन जालसाजों के खिलाफ फर्जी दस्तावेजों के आधार पर रजिस्ट्री कराने का मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस की शुरुआती जांच से पता चला है कि इस `property scam India` के पीछे एक संगठित गिरोह का हाथ है। अमीनाबाद निवासी संजय कुमार सोनी ने फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर ये दोनों जमीनें अपने नाम करवाई हैं। इस फर्जी रजिस्ट्री में प्रतापगढ़ निवासी राहुल सिंह और लखनऊ के पुराना हैदराबाद का रहने वाला अनिल सिंह गवाह बने हैं। चौंकाने वाली बात यह भी है कि इस गोरखधंधे में एक महिला भी शामिल है, जिसने शैलजा सिंह के नाम से फर्जी आधार कार्ड लगाकर रजिस्ट्री की है। पुलिस अब इन सभी आरोपियों की तलाश कर रही है।
सब-रजिस्ट्रार कार्यालय की भूमिका पर सवाल
प्रोफेसर महेंद्र मित्तल ने इस पूरे प्रकरण में सब-रजिस्ट्रार कार्यालय की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब रजिस्ट्री में उनकी और उनकी पत्नी की तस्वीरें स्पष्ट रूप से दिख रही थीं, तो सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में दस्तावेजों का ठीक से सत्यापन क्यों नहीं किया गया? उनका मानना है कि कोई भी सामान्य व्यक्ति भी इन फर्जी दस्तावेजों को देखकर जालसाजी को आसानी से पहचान सकता था। यह बताता है कि प्रक्रिया में कहीं न कहीं गंभीर खामियां या मिलीभगत रही होगी।
एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा: `Real Estate Fraud`
महेंद्र मित्तल ने पुलिस को एक और रजिस्ट्री का प्रमाण दिया है, जो बख्शी का तालाब के सकरपुर गांव में हुई है। उस रजिस्ट्री में भी संजय सोनी गवाह है, लेकिन वहां उसका नाम ओम प्रकाश लिखा है और उसने खुद को फतेहपुर जिले के बिदंकी तहसील का निवासी बताया है। प्रोफेसर मित्तल का आरोप है कि तहसील स्तर पर एक पूरा संगठित गिरोह फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जमीनों पर अवैध कब्जा कर रहा है। यह `real estate fraud` सिर्फ एक मामला नहीं, बल्कि एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा प्रतीत होता है, जो आम लोगों की मेहनत की कमाई और संपत्ति को निशाना बना रहा है। इस तरह के `land dispute` मामलों में आम नागरिक को बेहद सतर्क रहने की आवश्यकता है।



