05 अक्टूबर 2025 को तमिलनाडु के करूर में एक दर्दनाक हादसा हुआ था। एक्टर और TVK नेता विजय की रैली में हुई भगदड़ ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था, जिसमें 41 लोगों की जान चली गई। अब इस भयावह घटना पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सांसदों की फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट जारी की है, जिसने घटना के पीछे की कई परतों को उजागर किया है। रिपोर्ट में सीधे तौर पर प्रशासन को इस त्रासदी के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है, इसे ‘प्रशासनिक लापरवाही और कुप्रबंधन’ का सीधा परिणाम बताया गया है।
भीड़ प्रबंधन की विफलता और क्षमता से अधिक लोग
रिपोर्ट के अनुसार, रैली स्थल की क्षमता मात्र 3000 लोगों की थी, लेकिन वहां 30,000 से अधिक लोग एकत्र हो गए थे। यह अपने आप में भीड़ प्रबंधन (crowd mismanagement) की एक बड़ी विफलता को दर्शाता है। सुबह 9 बजे से ही लोगों का जुटना शुरू हो गया था, जबकि एक्टर विजय का आगमन दोपहर 12 बजे निर्धारित था। हालांकि, वे शाम 7 बजे तक ही पहुंच पाए, जिससे भीड़ में बेचैनी और असंतोष बढ़ता गया। जैसे ही विजय अपनी बस की छत पर भीड़ को संबोधित करने के लिए चढ़े, अफरा-तफरी मच गई और भीषण Karur stampede हुई।
बिजली कटौती और पानी की बोतलों ने बढ़ाई अराजकता
फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी की रिपोर्ट में कुछ और गंभीर खुलासे हुए हैं। बताया गया है कि भगदड़ के दौरान बिजली अचानक कट गई, और मौके पर मौजूद जनरेटर भी खराब हो गया, जिससे अंधेरा छा गया और अराजकता और बढ़ गई। इस बीच, एक्टर विजय ने अपनी बस की छत से भीड़ पर पानी की बोतलें फेंकनी शुरू कर दीं। इन्हीं बोतलों को उठाने की होड़ में नीचे झुके कई लोग कुचल गए, जिससे मौतें और घायल होने वालों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ। रिपोर्ट में कहा गया है कि महिलाओं और बच्चों सहित कई लोग इस भगदड़ में कुचल गए, और कुछ लोग अत्यधिक गर्मी के कारण बेहोश भी हो गए थे। एक हृदय विदारक घटना में, एक पिता ने अपनी 12 और 8 साल की दो बेटियों को खो दिया। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कुछ लोग खुले नाले में गिर गए और बाद में मृत पाए गए।
प्रशासन पर गंभीर आरोप और जिलाधिकारी की भूमिका
NDA report में जिले के कलेक्टर (DM) पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। सांसदों की टीम ने दावा किया कि जिलाधिकारी ने उनके दौरे के दौरान उनसे मिलने से इनकार कर दिया। सबसे बड़ा आरोप यह है कि स्थल की सीमित क्षमता के बावजूद कार्यक्रम को मंजूरी दी गई, जिसे एक गंभीर प्रशासनिक चूक माना गया है। इसके अलावा, रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि एक्टर विजय हादसे के तुरंत बाद घटनास्थल से चले गए थे।
दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग
फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी में शामिल सांसदों ने संबंधित अधिकारियों को प्रश्नावली भेजकर जवाब मांगा है और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। यह NDA report इस बात पर जोर देती है कि इस त्रासदी को प्रशासनिक लापरवाही (administrative negligence) और भीड़ के कुप्रबंधन का सीधा परिणाम माना जाए, और यह सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पुख्ता कदम उठाए जाएं। इस Karur stampede में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के लिए न्याय सुनिश्चित करना अब सबसे बड़ी प्राथमिकता है।



