बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले, शिक्षक बहाली का मुद्दा राज्य सरकार के लिए एक बड़ा सिरदर्द बन गया है। हजारों शिक्षक अभ्यर्थी लगातार अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, जिससे न केवल राजधानी पटना में यातायात बाधित हो रहा है, बल्कि सरकार पर दबाव भी बढ़ रहा है। उन्हें डर है कि अगर सरकार बदल जाती है, तो उनके लिए जारी होने वाला विज्ञापन भी रुक सकता है। इस गंभीर स्थिति के बीच, राज्य के Education Minister ने इस विषय पर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी है, जिससे अभ्यर्थियों में निराशा और अनिश्चितता का माहौल है।
शिक्षक बहाली: चुनावी साल में बढ़ा सरकार का सिरदर्द
चुनावी साल में Bihar Teacher Recruitment एक ऐसा मुद्दा बन गया है, जो सीधे तौर पर सरकार की नीतियों और भविष्य की संभावनाओं को प्रभावित कर रहा है। राजधानी पटना की सड़कों पर TRE-4 विज्ञापन की मांग को लेकर अभ्यर्थी लगभग हर सप्ताह प्रदर्शन कर रहे हैं। इन प्रदर्शनों के कारण शहर में बार-बार सड़क जाम की स्थिति बन रही है, जिससे आम लोगों को भी खासी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसा प्रतीत होता है कि यह रिक्रूटमेंट प्रॉसेस आगामी Bihar Elections के एजेंडे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। अभ्यर्थियों को आशंका है कि यदि राज्य में सत्ता परिवर्तन होता है, तो TRE-4 विज्ञापन जारी होने की उनकी उम्मीदें धूमिल हो सकती हैं। इसी डर से वे जल्द से जल्द विज्ञापन जारी करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिल रहा है।
TRE-4 पर शिक्षा मंत्री की चुप्पी और नई पहल
जब पत्रकारों ने Education Minister सुनील कुमार से TRE-4 विज्ञापन के संबंध में सवाल किया, तो उन्होंने इस बारे में कुछ भी स्पष्ट कहने से परहेज किया। इसके बजाय, मंत्री ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में शिक्षा क्षेत्र में हुए पुराने कार्यों और नई पहलों पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि 2005 से शिक्षा विभाग मुख्यमंत्री की प्राथमिकता रहा है, जिसके कार्यकाल में लाखों शिक्षकों की भर्तियां हुईं, स्कूलों की संख्या में वृद्धि हुई और बुनियादी ढांचे में सुधार किया गया।
मंत्री ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए बताया कि अब शिक्षा विभाग के साथ-साथ निजी क्षेत्र की मदद से CSR Funds का उपयोग किया जाएगा। इसके लिए कॉर्पोरेट सेक्टर और एनजीओ के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस पहल का उद्देश्य बच्चों को आधुनिक शिक्षा, डिजिटल लर्निंग और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करना है। मंत्री के अनुसार, यह कदम विशेष तौर पर छात्राओं के भविष्य को उज्ज्वल बनाने में सहायक होगा और आने वाले समय में इसका बेहतर प्रभाव देखने को मिलेगा।
पुराने आंकड़ों और भविष्य की योजनाओं का जिक्र
शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने अपनी बात रखते हुए बताया कि शिक्षा विभाग समाज को बदलने में सबसे बड़ा सहायक होता है और इसके लिए बजट का सबसे बड़ा हिस्सा आवंटित किया जाता है। उन्होंने दोहराया कि अब तक बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) के माध्यम से ढाई लाख से ज्यादा शिक्षकों, प्रधानाध्यापकों और प्रधान शिक्षकों की लगभग 3.45 लाख नियुक्तियां हो चुकी हैं।
TRE-4 के मुद्दे पर सीधा जवाब देने से बचते हुए, उन्होंने कहा, ‘आवश्यकता के अनुसार इस विषय में क्या जरूरत है, उसके अनुसार हम लोग वैकेंसी निकालते हैं। टीईटी-4 के बाद टीईटी-5 भी आएगा। शिक्षा विभाग में जो नियुक्तियां हुई हैं, भविष्य में भी होंगी। जो भी उनकी मांग है, उस पर विचार करेंगे।’ उन्होंने यह भी बताया कि नीतीश कुमार की सरकार में बिहार के अंदर युवतियों को विभिन्न विभागों में 10 लाख नौकरियां मिली हैं। हालांकि, इन बयानों से TRE-4 के इच्छुक अभ्यर्थियों को अपने सवाल का सीधा जवाब नहीं मिल पाया, जिससे उनकी चिंताएं अभी भी बरकरार हैं।



