इंदौर, मध्य प्रदेश: इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड कॉरिडोर परियोजना के खिलाफ प्रभावित किसानों का गुस्सा अब सड़कों पर फूटने को तैयार है। रविवार को रतनखेड़ी में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में किसानों ने इस परियोजना के विरोध में 8 अक्टूबर को इंदौर में एक विशाल ट्रैक्टर रैली (Tractor Rally) निकालने का बड़ा फैसला लिया है। इस बैठक में कई गांवों के किसान प्रतिनिधियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और सभी ने एक स्वर में सड़क योजना के खिलाफ जोरदार विरोध दर्ज कराया।
उपजाऊ भूमि पर संकट और किसानों की चिंताएं
यह महत्वाकांक्षी Indore-Ujjain Green Field Corridor योजना इंदौर जिले के लगभग 20 और उज्जैन जिले के 8 गांवों से होकर गुजरेगी। इस परियोजना के लिए कुल 288 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण (Land Acquisition) किया जाना प्रस्तावित है। किसान इस भारी-भरकम भूमि अधिग्रहण का पुरजोर विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह परियोजना उनकी सदियों से उपजाऊ रही कृषि भूमि पर सीधा हमला है, जिससे हजारों किसान परिवारों का जीवन और आजीविका गंभीर संकट में पड़ जाएगी। किसानों ने सरकार से इस परियोजना को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की मांग की है। यह सिर्फ जमीन का मुद्दा नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ी के लिए भी एक गंभीर Farmers Protest है।
अन्य प्रमुख मांगें और मुद्दे
ग्रीन फील्ड कॉरिडोर के विरोध के साथ ही, किसानों ने अपनी बैठक में अन्य कई महत्वपूर्ण मुद्दों और मांगों को भी उठाया:
- सोयाबीन की MSP पर खरीदी: किसानों ने सरकार से सोयाबीन की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदी सुनिश्चित करने की मांग की, ताकि उन्हें अपनी फसल का उचित दाम मिल सके।
- भावांतर योजना को समाप्त करने की मांग: बैठक में भावांतर योजना को समाप्त करने की भी मांग की गई। किसानों का तर्क है कि इस योजना से उन्हें वास्तविक लाभ नहीं मिल रहा है और यह उनकी उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी है।
- जंगली जानवरों से फसलों का नुकसान: किसानों ने जंगली सूअर (Wild Boar) और घोड़ा रोज (Nilgai) जैसे जानवरों से फसलों को हो रहे भारी नुकसान का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने सरकार से इस समस्या के समाधान के लिए प्रभावी कदम उठाने की अपील की।
पीढ़ियों के भविष्य के लिए आंदोलन
किसान नेता बबलू जाधव ने बैठक में जोर देते हुए कहा कि यह आंदोलन केवल किसानों की जमीन और आज की फसल के लिए नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के उज्जवल भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए भी है। उन्होंने कहा कि हम अपनी मिट्टी को बचाने और अपनी विरासत को आगे बढ़ाने के लिए कृतसंकल्प हैं। इस महत्वपूर्ण बैठक में रतनखेड़ी, अजनोद, बीबीखेड़ी, बालरिया, जिंदाखड़ा, हरिया खेड़ी, पोटलोद और मगरखेड़ी सहित आसपास के कई गांवों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे, जिन्होंने एक एकजुट Farmers Protest का संदेश दिया।



