नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने शेयर बाजार में एक महत्वपूर्ण बदलाव की घोषणा की है। इंडेक्स डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए क्वांटिटी फ्रीज लिमिट्स (Quantity Freeze Limit) को संशोधित किया गया है, जो 1 सितंबर 2025 से लागू होंगी। इन महत्वपूर्ण बदलावों की जानकारी 29 अगस्त को जारी एक सर्कुलर के जरिए दी गई है, जिसका सीधा असर डेरिवेटिव्स मार्केट में ट्रेडिंग करने वालों पर पड़ेगा।
क्या है यह बदलाव और क्यों जरूरी है?
NSE द्वारा जारी नए सर्कुलर के अनुसार, बैंक निफ्टी फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस के लिए परमिसिबल ऑर्डर साइज को प्रभावी रूप से बढ़ा दिया गया है। हालांकि, निफ्टी 50, फिननिफ्टी, निफ्टी मिडकैप सेलेक्ट और निफ्टी नेक्स्ट 50 जैसे अन्य कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए फ्रीज लिमिट्स में कोई बदलाव नहीं किया गया है। क्वांटिटी फ्रीज लिमिट्स बाजार की स्थिरता बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच के रूप में काम करती हैं। इनका मुख्य उद्देश्य किसी भी गलत या असामान्य रूप से बड़े ऑर्डर्स को रोकना है, जो बाजार को बाधित कर सकते हैं।
फ्यूचर्स और ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट्स में अधिकतम ऑर्डर साइज पर एक सीमा तय करके, एक्सचेंज ‘फैट फिंगर’ ट्रेड्स के जोखिम को कम करना चाहता है। ‘फैट फिंगर’ ट्रेड से आशय उन गलतियों से है, जहां ट्रेडर गलती से बहुत बड़ी मात्रा में ऑर्डर डाल देते हैं, जिससे बाजार में अचानक उतार-चढ़ाव आ सकता है। इन लिमिट्स का लक्ष्य डेरिवेटिव्स मार्केट के सुचारू और व्यवस्थित संचालन को सुनिश्चित करना है।
क्वांटिटी फ्रीज लिमिट्स क्या होती हैं?
शेयर बाजार में फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) में ट्रेडिंग करते समय, यदि कोई ट्रेडर गलती से या जानबूझकर बहुत बड़ा ऑर्डर डाल देता है, तो इससे बाजार में अत्यधिक अस्थिरता (volatility) पैदा हो सकती है या ‘फैट फिंगर ट्रेड’ जैसी गंभीर गलती हो सकती है। इस तरह के जोखिमों से बचाव के लिए, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) हर कॉन्ट्रैक्ट पर एक अधिकतम मात्रा तय करता है कि एक बार में कोई ट्रेडर कितनी क्वांटिटी का ऑर्डर डाल सकता है। इसे ही क्वांटिटी फ्रीज लिमिट कहा जाता है। जब कोई ऑर्डर इस लिमिट से अधिक होता है, तो वह सिस्टम द्वारा ‘फ्रीज’ कर दिया जाता है, जिससे उसे आगे बढ़ने से रोका जा सके।
ट्रेडिंग मेंबर्स के लिए महत्वपूर्ण सलाह
NSE ने अपने सभी ट्रेडिंग मेंबर्स को सलाह दी है कि वे प्रभावी तारीख (1 सितंबर 2025) से पहले संशोधित कॉन्ट्रैक्ट डिटेल्स के साथ अपने सिस्टम्स को अपडेट कर लें। अपडेटेड कॉन्ट्रैक्ट फाइल्स एक्सचेंज के एक्स्ट्रानेट सर्वर और इसकी आधिकारिक वेबसाइट से डाउनलोड के लिए उपलब्ध हैं। ये संशोधित लिमिट्स 1 सितंबर 2025 से इंडेक्स डेरिवेटिव्स में सभी ट्रेड्स पर लागू होंगी।
संशोधित क्वांटिटी फ्रीज लिमिट्स: एक नज़र
| Index | पुरानी लिमिट (1 जुलाई 2025) | नई लिमिट (1 सितंबर 2025) |
|---|---|---|
| बैंक निफ्टी | 600 | 900 |
| निफ्टी 50 | 1800 | 1800 |
| फिननिफ्टी | 1800 | 1800 |
| निफ्टी मिडकैप सेलेक्ट | 2800 | 2800 |
| निफ्टी नेक्स्ट 50 | 600 | 600 |
यह बदलाव डेरिवेटिव्स मार्केट में पारदर्शिता और सुरक्षा को और मजबूत करेगा, जिससे सभी ट्रेडर्स के लिए एक अधिक सुरक्षित ट्रेडिंग वातावरण सुनिश्चित होगा।



